.webp)
नवदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। शहर के बीचोंबीच स्थित 100 से अधिक आरा मशीनों को बाहर करने की कवायद करीब 48 साल से चली आ रही है। जिनको लेकर परवलिया सड़क इलाके के छोटा रातीबड़ में जमीन तय हो गई है लेकिन यहां पर बिजली, पानी, सड़क आदि मूलभूत सुविधाएं अधूरी हैं। यही कारण है कि मशीनों की शिफ्टिंग में देरी हो रही है। पिछले दिनों बोगदापुल से भारत टाकीज के बीच स्थित एक बड़ी आरा मशीन में आग लगने के बाद हड़कंप मच गया था और इन्हें शिफ्टिंग की चर्चा तेज हो गई थी।
कुछ दिन इस मुद्दे पर अधिकारियों और कारोबारियों के बीच चर्चा हुई लेकिन अब मामला ठंडे बस्ते में जाता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित छोटा रातीबड़ में सभी आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाना है। प्रशासन और कारोबारियों के बीच सहमति बनने के बाद जमीन पर पानी की टंकी, सड़क निर्माण, बिजली पोल व ट्रांसफार्मर लगने सहित अन्य निर्माण कार्य लगभग दो साल से किए जा रहे हैं।
यहां निर्माण कार्य की गति धीमी होने के कारण ही कारोबारी जाने को तैयार नहीं हैं, जबकि मेट्रो के कार्य के लिए हटने वाली 40 आरा मशीनों के लिए मेट्रो प्रबंधन भी करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये निर्माण कार्यों के लिए दे चुका है। ऐसे में सुविधाओं में देरी के कारण कारोबारी शिफ्ट होने से पीछे हट रहे हैं। वह सभी एक साथ शिफ्टिंग की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन दो चरणों में कार्रवाई करने की बात कर रहा है।
कैसे हो शिफ्ट नहीं बना पहुंच मार्ग? आरा मशीन कारोबारियों का कहना है कि छोटा रातीबड़ में बिजली, पानी आदि सुविधाएं पूरी हो भी जाएं तो पहुँचना मुश्किल है। यहाँ तक जाने के लिए मुख्य मार्ग नहीं है, जो है वह कम चौड़ा होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र से गुजरा है। ऐसे में आरा मशीन और लकड़ियों के ट्रक पहुँच पाना असंभव है। जब तक मार्ग अलग से नहीं बन जाता है तब तक शिफ्टिंग मुश्किल है।
18 एकड़ में होना है शिफ्टिंग। छोटा रातीबड़ स्थित 18 एकड़ जमीन पर आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाना है, जिस पर लघु उद्योग विभाग द्वारा फर्नीचर क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। यहाँ प्रत्येक आरा मशीन संचालक को न्यूनतम दर पर पांच हजार वर्गफीट का प्लाट देने की योजना है। बता दें कि 40 आरा मशीनों को सुभाष नगर से करोंद तक होने वाले मेट्रो रेल लाइन निर्माण के लिए हटाया जाना है।
बदर ए आलम (अध्यक्ष, टिंबर मर्चेंट एंड आरा मशीन एसोसिएशन): आरा मशीन कारोबारी एक साथ छोटा रातीबड़ जाने को तैयार हैं लेकिन वहाँ पर अब भी सुविधाएं नहीं हैं। जो भूखंड उपलब्ध करवाए जा रहे हैं वह समतल नहीं हैं। साथ ही पहुंचने के लिए चौड़ा मार्ग भी नहीं है। जब तक सुविधाएं नहीं हो जाती हैं तब तक शिफ्ट होना मुश्किल है। प्रशासन के दबाव में कारोबार ही बंद करना पड़ेगा।
आरा मशीनों की शिफ्टिंग को लेकर प्रक्रिया तेजी से चल रही है। छोटा रातीबड़ में अधिकांश निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, जो इस महीने खत्म हो जाएंगे। पहले चरण में 40 मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा, बाकी दूसरे चरण में शिफ्ट होंगी। - कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर
यह भी पढ़ें- MP ESB: सब इंस्पेक्टर और सूबेदार भर्ती परीक्षा की मॉडल उत्तर कुंजी जारी, सोमवार तक दर्ज कराएं आपत्ति