अब बिना चीर-फाड़ हटेंगे खून के थक्के, भोपाल में शुरू हुई पहली 'थ्रोम्बेक्टामी' सुविधा
MP News: भोपाल में रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी तकनीक की शुरुआत की गई है। मप्र-छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा केंद्र बन गया है जहां खून के जटिल थक्कों (ब्लड क्लाट) ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 22 Feb 2026 02:55:40 AM (IST)Updated Date: Sun, 22 Feb 2026 02:55:40 AM (IST)
भोपाल में बिना बड़ी सर्जरी सुई से हटेंगे खून के थक्के।HighLights
- भोपाल में बिना बड़ी सर्जरी सुई से हटेंगे खून के थक्के।
- MP-छत्तीसगढ़ का पहला 24x7 रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी सेंटर।
- हाथ-पैर की सूजन और दर्द को न करें नजरअंदाज।
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल में रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टामी तकनीक की शुरुआत की गई है। मप्र-छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा केंद्र बन गया है जहां खून के जटिल थक्कों (ब्लड क्लॉट) को हटाने के लिए अब 24 घंटे यह एडवांस मशीन उपलब्ध रहेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से अब बिना किसी बड़ी सर्जरी या मरीज को बेहोश किए, महज एक छोटी सुई के जरिए जानलेवा थक्कों को साफ किया जा सकेगा। यह सुविधा नोबल में शुरू की जा रही है।
दवा और मैकेनिकल प्रक्रिया से बहाल होगा रक्त प्रवाह
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इंटरवेंशनल रेडियोलाजिस्ट डॉ. अगम्य सक्सेना और डायरेक्टर डा. सर्वेश मिश्रा ने बताया कि यह प्रणाली फार्मोकोमैकेनिकल तकनीक पर काम करती है।
इसमें दवा और मैकेनिकल प्रक्रिया के मेल से थक्के को सुई के रास्ते खींचकर बाहर निकाल लिया जाता है, जिससे प्रभावित हिस्से में रक्त प्रवाह तुरंत बहाल हो जाता है। यह तकनीक हाथ, पैर, पेट और डायलिसिस फिस्टुला में बने थक्कों के लिए रामबाण है।
अस्पताल में 24x7 उपलब्ध रहेगी एडवांस सुविधा
डॉ. अगम्य सक्सेना अब तक 125 से अधिक सफल थ्रोम्बेक्टामी कर चुके हैं। पहले यह मशीन किराये पर मंगानी पड़ती थी, जिससे समय की बर्बादी होती थी, लेकिन अब अस्पताल में स्वयं का उपकरण होने से यह सुविधा 24x7 उपलब्ध रहेगी।
डॉ. सर्वेश मिश्रा ने सलाह दी कि हाथ-पैर में अचानक सूजन, दर्द या सुन्नता जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि समय पर इलाज ही लकवे जैसी स्थिति से बचा सकता है।