राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत भगवान राम, महावीर, बुद्ध की भूमि है। जन्म आधारित भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है।
जाति, पंथ, भाषा और प्रांत के भेद से समाज-संगठन कमजोर होता है। हम सब भारत मां, ईश्वर की संतान है, इसलिए मनुष्य के अंदर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं आना चाहिए।
जाति के नाम पर दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए, यह हिंदू समाज पर कलंक है, इससे हमें मुक्ति चाहिए। जातियों में बंटे समाज को एकजुट करना होगा। इसके लिए ऊंच-नीच, जाति-भेद और किसी भी प्रकार के हीनभाव को दूर करके एक सामर्थ्यवान समाज बनाना आवश्यक है।
यह बात होसबाले ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष की गतिविधियों के क्रम में रविवार को भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित स्वयंसेवकों के विराट एकत्रीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
मंतातरण पर काम करना जरूरी
उन्होंने कहा कि अंदर और बाहर से धूर्त शक्तियां समाज को तोड़ने और मतांतरित करने का कार्य कर रही हैं, इसके प्रति हम सभी को जागृत रहना पड़ेगा। विजिलेंस सोसायटी के रूप में काम करना होगा।
हर गांव और बस्ती के लोगों को समाज के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति एक घंटा शाखा के लिए निकाले।
होसबाले ने कहा कि आस-पड़ोस में संवाद मधुर हो, एक दूसरे को सब समझें। जीवन कैसे जीना है, दुनिया के सामने इसका मॉडल खड़ा करें। उन्होंने कहा कि संघ और समाज अलग नहीं है।
ऊंच-नीच, भेदभाव, आपस में लड़ाई, संस्कृति से विमुक्त होकर हम अपने कर्तव्य को भूल गए हैं, इसलिए हनुमान और जामवंत की तरह संघ समाज को जागृत करने का कार्य कर रहा हैं।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गौरव को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बढ़ाया है। सबकी इसमें भागीदारी होनी चाहिए।
अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचें - डॉ. नरेंद्र कोतवाल
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एम्स भोपाल के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. नरेंद्र कोतवाल ने कहा कि राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास के अवसर पहुंचें और प्रत्येक नागरिक स्वयं को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सहभागी समझे।
आरएसएस मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय तथा भोपाल विभाग संघचालक सोमकांत उमालकर भी मंच पर रहे। कार्यक्रम में भोपाल संघ-विभाग के पांच जिलों के छह नगरों की 250 बस्तियों में संचालित 800 शाखाओं से लगभग 15 हजार स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इनमें अधिकांश युवा स्वयंसेवक थे।
स्वयंसेवकों ने समता परेड, शारीरिक व्यायाम, दंड प्रयोग एवं योगाभ्यास भी किया।