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बशीर बद्र के निधन से अदब का एक शानदार दौर खत्म: सीएम मोहन यादव और साहित्यकारों ने जताया गहरा दुख

मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन से साहित्य, कला और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'पद्मश्री' से सम्मानित बशीर बद्र के निधन ...और पढ़ें

By Sushil PandeyEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Thu, 28 May 2026 09:26:26 PM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 09:26:26 PM (IST)
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बशीर बद्र के निधन से अदब का एक शानदार दौर खत्म: सीएम मोहन यादव और साहित्यकारों ने जताया गहरा दुख
बशीर बद्र के निधन से अदब का एक शानदार दौर खत्म।

HighLights

  1. बशीर बद्र के निधन से अदब का एक शानदार दौर खत्म
  2. सीएम मोहन यादव और साहित्यकारों ने जताया गहरा दुख
  3. मंजर भोपाली ने याद किए 35 साल के जुड़ाव के पल

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन से साहित्य, कला और राजनीतिक जगत में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'पद्मश्री' से सम्मानित बशीर बद्र के निधन पर गहन दु:ख जताया और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।

सीएम मोहन यादव ने जताया दु:ख

'पद्म श्री' से सम्मानित, प्रसिद्ध शायर डॉ. बशीर बद्र जी के निधन पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।

उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन को संवेदनशीलता, अपनत्व और मानवता के साथ जीने का संदेश दिया। अपनी शायरी से जिंदगी को बेहद आसान बनाने के…

— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 28, 2026

डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. बद्र ने अपनी शायरी के माध्यम से मानवता के साथ जीने का संदेश दिया। उन्होंने अपनी रचनाओं से सदी के महान शायरों में स्थान बनाया और जिंदगी को आसान बनाने के सूत्र भी दिए। उनके लेखन में बेजोड़ रचनात्मकता के दर्शन होते हैं।


मंजर भोपाली ने याद किए 35 साल के जुड़ाव के पल

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जाने-माने शायर मंजर भोपाली ने बद्र साहब के साथ अपने 35 साल के जुड़ाव को याद करते हुए बताया कि उन्होंने भारत और विदेशों में, जिनमें यूएई और दुबई भी शामिल हैं, दिवंगत कवि के साथ अनगिनत मुशायरों में हिस्सा लिया था। वे महबूब (प्रियतम) और मकबूल (लोकप्रिय) दोनों थे।

मंजर भोपाली ने बताया कि बद्र साहब ने गजलों में ऐसे शब्दों का प्रयोग शुरू किया जो पहले कभी इस्तेमाल नहीं होते थे। उन्होंने कहा कि यह वाकई दुखद है कि वे पिछले 14 वर्षों से लिख नहीं सके, वरना हमारे पास कविता का एक अनमोल खजाना होता। बद्र साहब शुद्ध उर्दू में नहीं लिखते थे, बल्कि वे उर्दू और हिंदी के मिश्रण में लिखते थे, जिसे हम हिंदवी या हिंदुस्तानी कहते हैं।

भोपाल से था विशेष लगाव

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लेखक अशोक मनवानी ने कहा कि वे गहरे से गहरे विचारों को सरलतम शब्दों में व्यक्त कर देते थे। इसी वजह से वे आम आदमी के चहेते बन गए। उनके शेर मुहावरे बन गए और संसद से लेकर चाय-पान की दुकानों तक हर जगह उद्धृत किए जाते थे। मैं 2024 में बशीर बद्र साहब से उनके घर पर मिला था। अपनी लंबी बीमारी के बावजूद वे खुश और संतुष्ट दिख रहे थे।

शायर बद्र वास्ती ने कहा कि बशीर बद्र इस दौर के आखिरी बड़े शायर थे। उन्होंने गजल को नया मोड़ दिया। उर्दू-हिंदी कविता को नए प्रतीक, नई उपमाएं और नए रूपक दिए, जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि बशीर बद्र किसी भी देश के किसी भी शहर में बस सकते थे, लेकिन उन्होंने भोपाल को चुना, क्योंकि उन्हें यह शहर और यहां के लोग बहुत प्रिय थे। दरअसल, उन्होंने भोपाल की राहत बद्र से शादी की थी।

बशीर बद्र के कुछ यादगार शेर

"परखना मत परखने में कोई अपना नहीं रहता,

किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता।"

"बड़े लोगों से फासला रखना,

जहां दरिया समंदर से मिला, दरिया नहीं रहता।"

"कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,

ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो।"

"मैं अपनी जेब में अपना पता नहीं रखता,

सफर में सिर्फ यही एक अहतमाम करता हूं।"

"मुझे खुदा ने गजल दयार बख्शा है,

यह सलतनत मैं मोहब्बत के नाम करता हूं।"

"सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,

इतना मत चाहो उसे वह बेवफा हो जाएगा।"