
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश के सरकार स्कूलों में नौवीं-10वीं कक्षाओं में पढ़ाने वाले संस्कृत शिक्षक खाली हो गए हैं। वजह बन रहा है माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की अंक योजना। जिसमें नौंवी व 11वीं में व्यावसायिक पाठ्यक्रम चुनने वालों को केवल दो भाषाएं ही पढ़ने की छूट है। विद्यार्थियों ने व्यावसायिक पाठ्यक्रम के साथ हिंदी और अंग्रेजी को चुनना पसंद किया है, तीसरी भाषा के तौर पर पढ़ाई जा रही संस्कृत उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है।
वहीं शासन का उद्देश्य है कि संस्कृत भाषा को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए। कई स्कूलों से ऐसी रिपोर्ट मिलने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग और महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान इसमें सक्रिय हुए हैं। अब प्रदेश भर के स्कूलों से ऐसे विद्यार्थियों की जानकारी मांगी गई है,जिन्होंने संस्कृत का चयन किया है। वहीं ऐसे भी स्कूलों की जानकारी मांगी गई है, जहां संस्कृत की कक्षाएं खाली जा रही हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग के पास यह शिकायत मिल रही है कि कई जिले के हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में संस्कृत विषय के उच्च माध्यमिक शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन उन स्कूलों में भी नौवीं एवं 11वीं में संस्कृत विषय को पढ़ाया नहीं जा रहा है। इस कारण सत्र 2025-26 और 2026-27 के कुल विद्यार्थियों की संख्या और नौवीं व 11वीं में संस्कृत विषय चयन करने वाले विद्यार्थियों की संख्या मांगी गई है।
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प्राचार्यों का कहना है कि नौवीं व 11वीं में दो भाषा के रूप में विद्यार्थी हिंदी व अंग्रेजी का चयन करते हैं। इसके अलावा एक व्यावयायिक पाठ्यक्रम का चयन करते हैं। इस तरह संस्कृत में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण शिक्षक खाली बैठे रह रहे हैं।
संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों की संख्या जुटाई जा रही है, ताकि बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सके। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाए। रविंद्र सिंह, निदेशक, महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान।