
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने प्रदेश की चर्चित शराब निर्माता कंपनी सोम डिस्टिलरीज के वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत सभी आबकारी लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन निरस्त कर दिए हैं। 175 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में उन्होंने कंपनी को फिट एंड प्रॉपर लाइसेंसी मानने से इन्कार किया है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कंपनी ने नवीनीकरण आवेदन के साथ महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाते हुए मिथ्या शपथपत्र प्रस्तुत किए हैं। जांच में फर्जी आबकारी परमिटों के उपयोग, अवैध मदिरा परिवहन, न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि, शासकीय बकाया संबंधी गलत जानकारी, फायर एनओसी एवं विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र के अभाव, बिना अनुमति 19 स्पिरिट टैंक निर्माण और बाल श्रम संबंधी प्रतिकूल तथ्यों सहित अनेक गंभीर अनियमितताएं सामने आईं थीं।
इस आधार पर राज्य सरकार ने सोम ग्रुप के लाइसेंस निलंबित किए थे लेकिन 31 मार्च को लाइसेंस की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर सोम ग्रुप नवीनीकरण करवाना चाह रहा था। उसने सरकार के निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सोम डिस्टिलरीज प्रकरण में लिया गया यह निर्णय प्रदेश की मोहन सरकार की जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट इल्लीगल एक्टिविटीज नीति का एक सशक्त उदाहरण है।
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने विस्तृत जांच, विधिक परीक्षण और तथ्यों के सूक्ष्म विश्लेषण के बाद लिए गए निर्णय के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आबकारी आयुक्त ने कई अदालती निर्णय और नियम-कानून का हवाला देकर स्पष्ट किया कि न्यायालयीन निर्णय में कंपनी को लाइसेंस नवीनीकरण का कोई सीधा अधिकार नहीं दिया था, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और कानून के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। विस्तृत परीक्षण में पाया गया कि कंपनी का अनुपालन रिकॉर्ड संतोषजनक नहीं है और उसका आचरण जिम्मेदार एवं विश्वसनीय लाइसेंसधारी के मानकों पर खरा नहीं उतरता।
फर्जी परिवहन परमिटों और अवैध मदिरा परिवहन प्रकरण में कंपनी के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किया जा चुका है, जिस आधार पर पूर्व में लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई भी हुई थी।
मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का बड़ा असर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और विधि के शासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ राज्य शासन ने सोम डिस्टिलरीज समूह की इकाइयों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत विभिन्न आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण संबंधी आवेदन निरस्त कर दिए हैं।
सोम के लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन निरस्त करने के निर्णय प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य भी महत्वपूर्ण रहे कि संबंधित समूह से जुड़े मामलों में पूर्व में अवैध शराब परिवहन, कूटरचित परमिटों के उपयोग, शासकीय राजस्व को क्षति पहुंचाने और आबकारी कानूनों के गंभीर उल्लंघन से संबंधित प्रकरण न्यायालयों के समक्ष विचारित हुए थे।
उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों, जांच प्रतिवेदनों और न्यायिक अभिलेखों का परीक्षण करते हुए संबंधित पक्ष के समग्र आचरण और विधिक अनुपालन की समीक्षा की गई। इसके उपरांत नवीनीकरण आवेदनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि लाइसेंस नवीनीकरण के प्रकरणों का परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, विधिक प्रावधानों और संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र एवं कारणयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए। न्यायालय द्वारा नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार प्रदान नहीं किया गया था। इसी विधिक दृष्टिकोण के अनुरूप सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर निर्णय लिया गया।