भोपाल में अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन विवाद: वक्फ ट्रिब्यूनल में स्टे पर नहीं हो सकी बहस, अब 23 जून को सुनवाई
गुरुवार को मध्य प्रदेश राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब मामले की अगल ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 15 May 2026 03:45:00 PM (IST)Updated Date: Fri, 15 May 2026 03:46:35 PM (IST)
भोपाल मट्रो। फाइल फोटो।HighLights
- बड़ा बाग कब्रिस्तान के नीचे प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन को लेकर वक्फ ट्रिब्यूनल में मामला पहुंचा
- न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई टल गई, अब 23 जून को होगी अगली सुनवाई
- वक्फ कमेटी ने कब्रिस्तान क्षेत्र प्रभावित होने और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक न करने पर आपत्ति जताई है
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। पुराने भोपाल के बड़ा बाग कब्रिस्तान के नीचे से प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। गुरुवार को मध्य प्रदेश राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 जून को होगी।
कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-अम्मा ने भोपाल टॉकीज स्थित बड़ा बाग कब्रिस्तान और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर मेट्रो निर्माण के विरोध में दो अलग-अलग प्रकरण दायर किए हैं। कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंसार उल हक और अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान पैरवी कर रहे हैं।
अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान ने बताया कि अब तक मामले में दो सुनवाई हो चुकी हैं। गुरुवार को स्टे आवेदन पर बहस होनी थी, लेकिन सुनवाई आगे बढ़ा दी गई।
कब्रिस्तान क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका
पहले प्रकरण में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से मेट्रो लाइन निकालने पर आपत्ति जताई गई है।
कमेटी का दावा है कि मेट्रो परियोजना से लगभग एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है और कई कब्रों की संरचना को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
यह भी पढ़ें- भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट को लेकर गहराया विवाद, वक्फ संपत्तियों पर काम को लेकर विरोध
तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक न करने का आरोप
कमेटी ने यह भी आरोप लगाया है कि मेट्रो परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने अब तक विस्तृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट और सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। इससे स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों की चिंता बढ़ गई है।