
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। दो सौ करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण विभाग के सभी टेंडरों का अनुमोदन कैबिनेट के द्वारा दिया जाता है लेकिन भंडार क्रय नियम के माध्यम से विभाग सीधे टेंडर करते हैं। सैंकड़ों करोड़ रुपये के टेंडर मनमर्जी से कर दिए जाते हैं।
शर्तें अपने हिसाब से तय होती हैं, जिसे लेकर शिकवा-शिकायत होती हैं और कई बार मामले न्यायालय भी पहुंच जाते हैं। इस व्यवस्था में सुधार के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भंडार क्रय नियम को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग से लेकर वित्त विभाग के अधीन कर दिया है।
अब विभाग टेंडर को लेकर नए सिरे से व्यवस्था बनाएगा ताकि पारदर्शिता रहे। बैठक में इस वर्ष किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं पर 40 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसे मिलाकर किसान को प्रति क्विंटल 2,625 रुपये मिलेंगे।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सामग्री क्रय प्रकिया में जैम पोर्टल का अधिक से अधिक करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए संशोधन के अनुसार कार्यवाही करने के लिए 16 जून 2025 को पत्र लिखा था। उत्तर प्रदेश ने ऐसे 33 से अधिक पुराने खरीद नियमों को समाप्त कर दिया है, जो जैम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) के प्रभावी उपयोग में बाधा डालते थे।
कार्यालयों के लिए स्टेशनरी से लेकर वाहनों की खरीद तक सब कुछ जैम के माध्यम से ही किया जा रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश में भंडार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम के अंतर्गत बड़ी-बड़ी खरीदी की जा रही हैं। इनको लेकर आरोप भी लगते हैं कि टेंडर की शर्तें चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं। पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने तय किया है कि इस पूरी व्यवस्था को अब वित्त विभाग देखेगा।
विभाग में एक-एक प्रस्ताव का बारीकी से परीक्षण होता है। संबंधित विभागों से अभिमत लिए जाते हैं, इसके बाद अनुमति मिलती है। सूत्रों का कहना है कि विभाग अब नए सिरे से व्यवस्था बनाएगा। इस वर्ष किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं पर 40 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इसे मिलाकर किसान को प्रति क्विंटल 2,625 रुपये मिलेंगे। उपार्जन एक अप्रैल से प्रारंभ होगा। वहीं, यह निर्णय भी लिया गया कि जो गेहूं खरीदा जाएगा, भारत सरकार द्वारा उसे किसी कारण से स्वीकार न करने पर ऐसी मात्रा का निस्तारण राज्य नागरिक आपूर्ति निगम खुली निविदा के माध्यम से करेगा।
इस पर जो व्यय भार आएगा, उसे राज्य सरकार वहन करेगी। प्रोत्साहन राशि और सरप्लस मात्रा के निस्तारण व्यय की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना के माध्यम से की जाएगी। एक अन्य निर्णय में रीवा की पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 228 करोड़ 42 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इससे 7,350 हेक्टेयर क्षेत्र के 37 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।
बैठक में उज्जैन शहर में चिमनगंज मंडी से इंदौर गेट तक फोरलेन एवं निकास चौराहा से इंदौर गेट तक टूलेन ऐलिवेटेड कारिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई। इस पर 945 करोड़ 20 लाख रुपये व्यय होंगे। वहीं, लोक निर्माण विभाग अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 4,525 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसमें सड़क विकास निगम की विभिन्न योजनाओं के साथ 31 मार्च 2031 तक सरकारी आवास गृह, विश्राम गृहों के रखरखाव और अनुरक्षण के लिए 200 करोड़, कार्यालय भवनों के रखरखाव, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनुरक्षण, शौर्य स्मारक के संचालन और संधारण के लिए 300 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का नाम बदलकर गोपालन एवं पशुपालन करने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने इसकी घोषणा की थी।
कैबिनेट की बैठक में लंबे समय बाद नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहुंचे। भागीरथपुरा में दूषित जल की घटना के बाद से वह बैठकों से दूरी बनाए हुए थे। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी पिछली बैठक में नहीं आए थे। दोनों मंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की थी। उसी दिन मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने भी भेंट की थी। इसे लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।