भोपाल एम्स में मासूम की मौत पर हंगामा, पिता का आरोप- मना करने के बाद भी नर्स ने लगाया गलत इंजेक्शन, जांच कमेटी गठित
राजधानी के एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान एक तीन वर्षीय बच्चे की मौत के बाद भारी तनाव की स्थिति बन गई है। भोपाल निवासी सार्थक यादव पुत्र सिद्धार्थ या ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 21 Mar 2026 10:26:47 PM (IST)Updated Date: Sun, 22 Mar 2026 01:33:15 AM (IST)
AIIMS भोपाल में लापरवाही का आरोप। (सांकेतिक तस्वीर)HighLights
- AIIMS भोपाल में लापरवाही का आरोप
- एम्स प्रबंधन ने बैठाई उच्च स्तरीय जांच
- डॉक्टरों ने भी माना गलत था इंजेक्शन
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान एक तीन वर्षीय बच्चे की मौत के बाद भारी तनाव की स्थिति बन गई है। भोपाल निवासी सार्थक यादव पुत्र सिद्धार्थ यादव ब्लड कैंसर से पीड़ित था। उसकी मौत के बाद स्वजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि बच्चे को गलत तरीके से एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया गया, जिससे उसकी हालत तुरंत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों के आरोप और लापरवाही का दावा
मृतक के पिता सिद्धार्थ यादव ने रोते हुए बताया कि उन्होंने ड्यूटी पर तैनात नर्स को तीन बार टोकते हुए इंजेक्शन लगाने से मना किया था, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। पिता का आरोप है कि जो इंजेक्शन नस में नहीं लगना चाहिए था, उसे सीधे नस में दे दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल के ही कुछ डॉक्टरों ने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया है कि एनेस्थीसिया का गलत डोज ही मौत की वजह बना है। पीड़ित पिता की मांग है कि दोषी नर्स को तुरंत बर्खास्त कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह भी पढ़ें- 'भगवान जगन्नाथ' को वृंदावन ले गया पुजारी, अनशन पर बैठे महंत, कहा- प्रभु लौटेंगे तभी खाऊंगा खाना... पुलिस टीम मथुरा रवाना
एम्स प्रशासन का पक्ष और जांच की कार्रवाई
इस संवेदनशील मामले में एम्स प्रशासन का कहना है कि संस्थान में हर मरीज का उपचार पूरी तरह तय प्रोटोकॉल के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में होता है। ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए कीमोथेरेपी और अन्य दवाओं का निर्णय हेमेटोलॉजी व मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ ही लिखित आदेश के बाद करते हैं। इंजेक्शन केवल प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ द्वारा ही दिया जाता है।
एम्स प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी जांच करेगी कि क्या वाकई बच्चे को गलत इंजेक्शन दिया गया या फिर मौत की वजह ओवरडोज या बीमारी की गंभीर अवस्था थी। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।