
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के पराक्रम की जानकारी देशवासियों तक पहुंचाने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा की गई विवादित टिप्पणी के मामले में सरकार अभियोजन की स्वीकृति नहीं देगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में पूरे मामले पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया। अब इसे अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास भेजा जाएगा क्योंकि वे नियुक्तिकर्ता हैं। सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को इस मामले की सुनवाई है, जिसमें सरकार की ओर से शपथ पत्र दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार कैबिनेट की बैठक में मंत्री विजय शाह के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति का विषय रखा गया। इस दौरान सभी अधिकारियों को बैठक से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। मंत्रियों के अलावा मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह संजय शुक्ला सहित विधि विभाग के अधिकारी ही उपस्थित थे। चर्चा के दौरान यह तर्क दिया गया कि विजय शाह की मंशा सेना की अधिकारी के अपमान की नहीं थी।
वे तीन बार सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांग चुके हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर 19 जनवरी 2026 की सुनवाई में नाराजगी जताई थी कि माफी मांगने में काफी देर हो चुकी है। जबकि, सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सफाई के तौर पर यह बताया गया कि मंत्री की मंशा अपमान करने की नहीं थी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन को लेकर शीघ्र निर्णय करने कहा था, जिस पर मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया गया। चूंकि, मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है।
विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदौर के महू के राय कुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में बिना कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लिए कहा था कि उन्होंने आतंकियों ने कपड़े उतार-उतारकर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।
विजय शाह के बयान का राजनीतिक और सामाजिक तौर पर विरोध हुआ। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और उसके निर्देश पर एफआईआर हुई। बाद में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी गठित की गई, जिसने जांच पूरी करके आगे की कार्रवाई के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत अभियोजन की मंजूरी मांगी थी।
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