केन-बेतवा प्रोजेक्ट में 'कमीशनखोरी', मुआवजे के बदले मांगी 1.60 लाख की घूस; एसीबी ने पटवारी राहुल अग्रवाल को 50 हजार लेते दबोचा
मुआवजे में घूसखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक पटवारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 19 Mar 2026 09:04:18 PM (IST)Updated Date: Thu, 19 Mar 2026 09:04:18 PM (IST)
केन-बेतवा प्रोजेक्ट में 'कमीशनखोरी' नईदुनिया प्रतिनिधि, छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजे में घूसखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक पटवारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी महिला किसान से मुआवजे के बदले 1.60 लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा था।
मुआवजे के बदले मांगा कमीशन
जानकारी के अनुसार बिजावर तहसील के नेगुंवा गांव की आदिवासी महिला किसान सगुंती बाई की जमीन परियोजना के डूब क्षेत्र में आ गई थी। इसके एवज में उसकी बेटी के नाम पर करीब 12.50 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ। आरोप है कि पटवारी राहुल अग्रवाल ने इस मुआवजे के बदले 1.60 लाख रुपये की मांग की और पहले ही 40 हजार रुपये ले चुका था।
ऐसे बिछाया जाल
पीड़िता ने परेशान होकर एंटी करप्शन ब्यूरो सागर में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद टीम ने योजना बनाकर पटवारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। आरोपी ने महिला को छतरपुर में एसपी कार्यालय के पास पैसे देने के लिए बुलाया।
रंगे हाथों पकड़ा गया आरोपी
जैसे ही महिला ने पाउडर लगे 500 रुपये के नोट पटवारी को दिए, ACB टीम ने उसे मौके पर पकड़ लिया। पकड़ में आते ही आरोपी ने नोटों की गड्डी फेंक दी, लेकिन टीम ने उसे हिरासत में ले लिया। जांच के दौरान उसके हाथ धुलवाने पर रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।
जांच में सहयोग नहीं कर रहा था पटवारी
कार्रवाई के दौरान आरोपी पटवारी कागजी प्रक्रिया में भी सहयोग नहीं कर रहा था और हस्ताक्षर करने में आनाकानी कर रहा था, जिससे टीम को कार्रवाई पूरी करने में मशक्कत करनी पड़ी।
अन्य किसानों से भी वसूली का आरोप
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि पटवारी मुआवजा पाने वाले अन्य लोगों से भी रिश्वत मांग रहा था और कई से पैसे ले चुका है। पैसे न देने पर काम रोकने की धमकी दी जाती थी।
बुंदेलखंड की बड़ी परियोजना
44 हजार करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे 1.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। परियोजना के तहत कई गांवों के हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
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