
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के परासिया में हुए सनसनीखेज 'कोल्ड्रिफ कफ सीरप कांड' के आरोपित अनिल रसेला की जमानत याचिका परासिया न्यायालय ने खारिज कर दी है। मासूम बच्चे मयंक की मृत्यु से जुड़े इस मामले में स्वास्थ्य और जनहित की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपित को राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
अभियुक्त अनिल रसेला (67 वर्ष), निवासी वार्ड 9, स्टेशन रोड परासिया, 'रसेला मेडिकल स्टोर्स' का संचालक है। डॉक्टर ने मृतक बच्चे मयंक के लिए 'सीरप सीपीपी' लिखा था। आरोप है कि अनिल रसेला ने डॉक्टर से सलाह लिए बिना उसकी जगह कोल्ड्रिफ सीरप दे दिया। इस सीरप को पीने के बाद बच्चे मयंक की किडनी फेल हो गई और उसकी मृत्यु हो गई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी संजय शंकर पाल ने न्यायालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे । जिसमें बताया कि आरोपित को 'न्यू अपना फार्मा' द्वारा कोल्ड्रिफ सीरप की 22 बोतलें सप्लाई की गई थीं। घटना के बाद डर के कारण आरोपित ने शेष बची बोतलों को साक्ष्य नष्ट करने के उद्देश्य से फेंक दिया।
उन 22 बोतलों का कोई बिक्री रिकॉर्ड या वैधानिक विनिष्टीकरण का अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। यह मामला सीधे तौर पर जन स्वास्थ्य और एक मासूम की जान से जुड़ा है। इस मामले के अन्य आरोपियों डॉ. प्रवीण सोनी, ज्योति सोनी, सौरभ जैन और राजेश सोनी की जमानत याचिका जबलपुर उच्च न्यायालय पहले ही निरस्त कर चुका है।
दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश गौतम कुमार गुजरे ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। न्यायालय ने माना कि यह एक जघन्य और संवेदनशील अपराध है, जिसके बाद आरोपी अनिल रसेला का द्वितीय जमानत आवेदन निरस्त कर दिया गया।
दवाओं के मामले में 'प्रिस्क्रिप्शन' के साथ छेड़छाड़ करना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक आपराधिक कृत्य है। यह मामला मेडिकल संचालकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं को अपनी मर्जी से न बदलें। इस मामले में न्यायालय का सख्त रुख पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगाता है।