
छिंदवाड़ा। जिले के पोआमा में एक शादी समारोह उस वक्त हड़कंप में बदल गया, जब बारातियों को परोसे गए खाने को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि बारात में परोसा गया रायता एक ऐसी गाय के दूध से तैयार किया गया था, जो रेबीज (हाइड्रोफोबिया) से संक्रमित थी।
जैसे ही यह जानकारी फैली, शादी समारोह में अफरा-तफरी मच गई। स्वजनों और ग्रामीणों ने तुरंत एहतियात बरतते हुए सभी बारातियों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों की सलाह पर करीब सभी प्रभावित लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए गए।मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है।
जांच में यह बात सामने आई कि उक्त गाय को करीब एक सप्ताह पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। इसके बावजूद, पशु मालिक ने लापरवाही बरतते हुए गाय का दूध निकालना बंद नहीं किया।
मंगलवार को अचानक गाय की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिससे यह खबर पूरे गांव में फैल गई कि उसी 'संक्रमित' दूध से बना मट्ठा बारात में मेहमानों को परोसा गया है। जैसे ही प्रशासन को इसकी सूचना मिली, स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल सक्रिय हो गई। उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड में आपातकालीन कैंप लगाया गया।
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अब तक लगभग 92 लोगों को रेबीज के निवारक इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। मौके पर टीकों की कमी पड़ने के कारण जिला मुख्यालय से अतिरिक्त डोज मंगवाए गए हैं। ग्रामीण जागेश्वर सोनी ने बताया कि "बारात में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। सभी को सूचना देकर स्वास्थ्य केंद्र बुलाया जा रहा है। स्वास्थ्य अमला लगातार निगरानी कर रहा है।"
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ने ग्रामीणों और बारातियों से अपील की है कि जिस किसी ने भी उस मट्ठे का सेवन किया है, वह तुरंत जांच कराए।पशुओं के काटने या उनके व्यवहार में बदलाव दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक को सूचित करें।ऐसे पशुओं के दूध का उपयोग न करें जिन्हें किसी संदिग्ध जानवर ने काटा हो। फिलहाल, स्वास्थ्य अमला गांव में ही मौजूद है और हर संदिग्ध मामले पर पैनी नजर रखी जा रही है।
पशु चिकित्सा अधिकारी लोकेश बेलवंशी ने कहा कि यदि जानवर रेबीज से संक्रमित है, तो उसके कच्चे दूध का सेवन करने से संक्रमण का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दूध को उच्च तापमान (लगभग 65°C से अधिक) पर पर्याप्त समय तक उबालने से वायरस निष्क्रिय हो सकता है, लेकिन कच्चे या कम गर्म दूध से खतरा बना रहता है।इस मामले में विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हैं, एहतियात के तौर पर आवश्यक कदम उठाए गए हैं ।