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दतिया हार के बाद भाजपा में बड़ा मंथन, नरोत्तम मिश्रा का घटेगा प्रभाव? जिलाध्यक्ष की रेस में आशुतोष तिवारी और पिरौनिया सबसे आगे

दतिया उपचुनाव में हार के बाद भाजपा संगठन के पुनर्गठन की तैयारी में है। आशुतोष तिवारी और घनश्याम पिरौनिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं, जबकि संगठन अन...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 09:14:18 PM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 09:19:56 PM (IST)
दतिया हार के बाद भाजपा में बड़ा मंथन, नरोत्तम मिश्रा का घटेगा प्रभाव? जिलाध्यक्ष की रेस में आशुतोष तिवारी और पिरौनिया सबसे आगे
दतिया हार के बाद भाजपा में बड़ा मंथन। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. दतिया भाजपा में संगठन पुनर्गठन की तैयारी तेज हुई।
  2. आशुतोष तिवारी प्रभावी भूमिका के प्रमुख दावेदार बने।
  3. घनश्याम पिरौनिया जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दतिया विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में पराजय के बाद भाजपा के सामने दतिया में नरोत्तम मुक्त जिला दतिया में नये सिरे से संगठन की संरचना और जिलाध्यक्ष का चयन बड़ी चुनौती माना जा रहा है।दतिया जिलाध्यक्ष की कमान सौपने के लिए भाजपा प्रभावशाली चेहरे की तलाश कर रही है, जो कि संगठन को मजबूत करने के साथ पूर्व गृहमंत्री के प्रभाव के सामने मजबूती के साथ खड़ा रह सके।

प्रदेश नेतृत्व आशुतोष तिवारी की दतिया जिले में सक्रियता बनाये रखने के लिए प्रभावी भूमिका में लाने पर विचार हो रहा है। तिवारी अंचल में संभागीय संगठन दायित्व संभाल चुके हैं। उन्हें संगठन को नये सिरे से खड़ा करना और संगठन के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ताओं को गढ़ने का अनुभव भी है।


नरोत्तम समर्थकों को बचाने के लिए दिल्ली रवाना

जिलाध्यक्ष के लिए आशुतोष तिवारी के बाद दूसरा नाम घनश्याम पिरौनिया का है, जो कि अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित भांडेर से विधायक रह चुके हैं और क्षेत्र अनुसूचित वर्ग चुुनाव की दृष्टि से निर्णायक भूमिका है। अकेले दतिया विधानसभा क्षेत्र में 23.8 प्रतिशत हैं। दूसरी तरफ मिश्रा समर्थकों पर शुरू हुई कार्रवाई को रोकने के लिए भोपाल व दिल्ली में नेताओं के दरवाजे में दस्तक दे रहे हैं, जिससे आगे होने वाली कार्रवाईयों से समर्थकों को बचा सके।

अनुसूचित वर्ग को साधने के लिए घनश्याम पिरौनिया की प्रभावी भूमिका होगी

  • संगठन को नए सिरे से खड़ा करने के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता आशुतोष तिवारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। तिवारी पूर्व में संभागीय संगठन का दायित्व निभा चुके हैं और उन्हें बूथ स्तर तक संगठन विस्तार तथा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का अनुभव है।

  • प्रदेश नेतृत्व उन्हें दतिया में प्रभावी भूमिका देकर संगठन को नई दिशा देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि उन्हें ऐसी जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे वे जिले में संगठन को मजबूत करने और नए नेतृत्व को तैयार करने का काम कर सकें।
  • जिलाध्यक्ष पद के लिए दूसरा प्रमुख नाम पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया का है। अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित भांडेर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पिरौनिया संगठन और क्षेत्रीय राजनीति दोनों में सक्रिय रहे हैं। दतिया विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 23.8 प्रतिशत है।
  • बसपा के विकल्प के रूप में अनुसूचित वर्ग की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदार यादव को भी 23 हजार वोट हासिल करने में कामयाब हुए हैं। ऐसे में यदि भाजपा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर निर्णय लेती है तो पिरौनिया मजबूत दावेदार साबित हो सकते हैं।
  • बुंदेलखंड की राजनीति का केंद्र है दतिया

    • उपचुनाव के बाद डॉ. नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर शुरू हुई संगठनात्मक कार्रवाई ने भी पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है। सूत्र बताते हैं कि कई नेता भोपाल और दिल्ली में वरिष्ठ नेतृत्व से लगातार संपर्क कर रहे हैं, ताकि समर्थकों के खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई को रोका जा सके। हालांकि प्रदेश नेतृत्व इस बार संगठनात्मक अनुशासन और जवाबदेही के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है।

  • भाजपा के लिए दतिया केवल एक जिला नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इसलिए उपचुनाव की हार के बाद यहां होने वाला संगठनात्मक पुनर्गठन भविष्य की चुनावी रणनीति की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
  • पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई जिला टीम गुटीय राजनीति से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करे और कार्यकर्ताओं का विश्वास दोबारा हासिल करे। ऐसे में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति और संगठन में होने वाले बदलाव आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकते हैं।