लक्ष्मीबाई, जीवाजी राव और भवानी सिंह की दुर्लभ पेंटिंग्स संरक्षण के लिए भोपाल भेजे गए
पुरातत्वविद् डा. वसीम खान के अनुसार पेंटिंग में दिखाई देने वाली टोपी संभवत: उनके दत्तक पुत्र दामोदरराव की है और यह चित्र उनके गोद लेने के समारोह से जु ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 15 May 2026 02:54:28 PM (IST)Updated Date: Fri, 15 May 2026 02:55:25 PM (IST)
दुर्लभ सामग्री का राजपरिवार के साथ अवलोकन करती पुरातत्व टीम। नईदुनियाHighLights
- ज्ञान भारतम मिशन के तहत दतिया संग्रहालय से संग्रहित की गई धरोहरें
- टीम के मुताबिक लक्ष्मीबाई की वर्ष 1853 की पेंटिंग प्राकृतिक रंगों ने बनाई गई
- इन दुर्लभ पेंटिंग्स का डिजिटाइजेशन व कंजर्वेशन भी किया जाएगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, दतिया। दतिया संग्रहालय से महारानी लक्ष्मीबाई, जीवाजीराव सिंधिया, महाराजा भवानी सिंह व महाराज दलपत शाह की अत्यंत दुर्लभ पेंटिंग्स को संरक्षित करने के लिए भोपाल स्थित अभिलेखागार भेजा गया है। दतिया आई पुरातत्व विभाग की टीम ने संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए इनका चयन किया है। टीम के मुताबिक महारानी लक्ष्मीबाई की वर्ष 1853 की पेंटिंग प्राकृतिक रंगों और स्वर्ण मिश्रित रंगों से अत्यंत बारीक कारीगरी के साथ बनाई गई है। हालांकि इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है।
पुरातत्वविद् डा. वसीम खान के अनुसार पेंटिंग में दिखाई देने वाली टोपी संभवत: उनके दत्तक पुत्र दामोदरराव की है और यह चित्र उनके गोद लेने के समारोह से जुड़ा हो सकता है। ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत दतिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में दतिया संग्रहालय में संरक्षित प्राचीन चित्रों और पांडुलिपियों के संरक्षण का कार्य प्रारंभ किया गया।
ज्ञान भारतम् मिशन के नोडल अधिकारी व विज्ञानी पीसी महोबिया, पुरातत्वविद् डा. वसीम खान सहित विभागीय दल ने पिछले सप्ताह दतिया के लोकेंद्र सिंह गुर्जर नागर के पास संरक्षित 32 दुर्लभ पांडुलिपियों का अध्ययन कर उनकी जानकारी ज्ञान भारतम् एप पर अपलोड की। लगभग 150 वर्ष पुरानी इन पांडुलिपियों में भगवान श्रीराम से संबंधित धार्मिक ग्रंथों सहित कई दुर्लभ दस्तावेज शामिल हैं।
525 दुर्लभ पांडुलिपियों को अवलोकन किया
विभागीय दल ने दतिया किला पहुंचकर दतिया राजपरिवार के घनश्याम सिंह जूदेव और महाराज अरुणादित्य सिंह जूदेव के पास संरक्षित 525 दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया। इन पांडुलिपियों में पद्म पुराण, दांतों की चिकित्सा से संबंधित दुर्लभ ग्रंथ, राजा विक्रमादित्य पर आधारित दामोदर कृत हस्तलिखित सिंहासन बत्तीसी, राग-रागिनी, कृष्ण लीला, आयुर्वेद, साहित्य और धार्मिक विषयों पर आधारित अनेक ऐतिहासिक पांडुलिपियां शामिल हैं, जो आज भी सुरक्षित अवस्था में संरक्षित हैं। विभागीय दल ने दतिया संग्रहालय में रखी प्राचीन पेंटिंग्स का भी सूक्ष्म अध्ययन किया।
गौरतलब है कि भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम् मिशन योजना के अंतर्गत देशभर के मंदिरों, मठों, मस्जिदों, विद्यालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के पास संरक्षित इतिहास, विज्ञान, गणित, आयुर्वेद एवं अन्य प्राचीन ज्ञान से जुड़ी हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजकर सुरक्षित किया जा रहा है। मिशन के तहत 16 जून तक प्राचीन पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम् एप पर अपलोड करने का कार्य किया जाएगा। साथ ही इन दुर्लभ पेंटिंग्स और दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन व कंजर्वेशन भी किया जाएगा।