बाबूओं ने जारी कर डाले फर्जी आदेश, रजिस्ट्रार ने पकड़ी धोखाधड़ी, देवास का मामला
जानकारी के अनुसार यह फर्जीवाड़ा लम्बे समय से किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार भू राजस्व संहिता की धारा 165-6 से जुड़े आवेदनों में बिना अधिकारियों की ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 14 Apr 2026 08:36:06 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Apr 2026 08:38:54 PM (IST)
देवास में सामने आया फर्जीवाड़ा।HighLights
- बाबुओं ने जारी कर डाले फर्जी आदेश।
- तीन बाबू व एक अन्य आरोपित गिरफ्तार
- कलेक्टोरेट में आदेश जारी होने का मामला
नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास। कलेक्टर कार्यालय की विभिन्न शाखाओं के आदेशों को जारी करने में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े में कलेक्टर कार्यालय नजूल शाखा में पदस्थ एक बाबू के अलावा दो विभिन्न तहसीलों में पदस्थ बाबू व एक दलाल भी शामिल है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक फर्जी आदेश पंजीयन कार्यालय पहुंचा। पंजीयन कार्यालय में शंका होने पर जानकारी कलेक्टर को दी गई, जिसके बाद जांच हुई और उप पंजीयक की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज बनाने सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया।
जानकारी के अनुसार यह फर्जीवाड़ा लम्बे समय से किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार भू राजस्व संहिता की धारा 165-6 से जुड़े आवेदनों में बिना अधिकारियों की जानकारी के बाबुओं ने संगठित होकर आदेश व अनुमति का खेल किया। इस प्रकार के लगभग 1 दर्जन आदेश, अनुमति होने संबंधी बात शुरूआती जानकारी में आई है।
पुलिस के अनुसार उप पंजीयक की शिकायत पर 4 आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है, इनमें नजूल शाखा का बाबू रमेश लोबानिया, एडीएम के रीडर संजय जाटव, विजयगंज मंडी तहसील का बाबू जितेंद्र भद्रे और इनके लिए फर्जी प्रकरण लाने वाला बिचौलिया महेंद्र कुशवाह पकड़ा गया है। मामले में एक अन्य बाबू की तलाश भी पुलिस कर रही है।
संगठित होकर किया फर्जीवाड़ा
- सूत्रों के अनुसार आरोपित बाबू के पद पर होने के कारण इन्हें सभी प्रकार के आदेश और अनुमतियों के जारी होने की पूरी प्रकिया थी।
- इसी का फायदा उठाकर आरोपित पहले विधिवत आवेदन करवाते और पूरी प्रक्रिया को सफाई के साथ करते थे।
- इसके बाद सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर की प्रति व सील दस्तावेज पर लगाकर अनुमति जारी कर देते थे। ये सारी प्रक्रिया अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर की जा रही थी।
- प्रारंभिक जानकारी के अनुसार धारा 165-6 के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित व्यक्तियों की जमीनों के अंतरण संबंधी आदेश जारी किए जाते हैं।
- इनको अधिकारियों की बिना जानकारी के फर्जी तरीके से बनाया गया। काम इतना सफाई से किया जाता था कि किसी अधिकारी को इनपर शंका भी नहीं हुई।
जांच और पूछताछ में खुली परतें
इस मामले में शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपित महेंद्र कुशवाह को पकड़ा। कुशवाह से पूछताछ के आधार पर तीनों बाबुओं की गिरफ्तारी की गई। सूत्रों के अनुसार इस प्रकार के फर्जी आदेश से एक रजिस्ट्री भी हो गई थी, जिसे खारिज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि कलेक्टर कार्यालय से विभिन्न मामलों में जारी होने वाले आदेश व अनुमति में फर्जीवाड़े करने संबंधी शिकायत थी। मामले में आरोपितों से पूछताछ की जा रही है। सभी को बुधवार को न्यायालय में प्रस्तुत कर रिमांड लिया जाएगा।
फर्जी तरीके से आदेश, अनुमति संबंधी जारी होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। सभी आरोपितों के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज करवाया गया है। आगे की जांच भी की जा रही है। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। संबंधित कर्मचारियों को पद से पृथक किया जाएगा।
- ऋतुराज सिंह, कलेक्टर, देवास