
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार-तिरला। चिकलिया फाटे पर 29 अप्रैल को हुए दर्दनाक सड़क हादसे का दुख अब और बढ़ गया है। हादसे में घायल केसरबाई ने इंदौर के अस्पताल में 12 दिनों तक जिंदगी के लिए संघर्ष किया, लेकिन रविवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया। इस हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है।
केसरबाई का शव जब गांव नयापुरा पहुंचा तो पूरा गांव गम में डूब गया। घर के आंगन में चीख-पुकार मच गई और स्वजन बिलख पड़े। सोमवार को मृतक के स्वजन को सीएम राहत कोष से चार लाख रुपये उनके खातों में डले है। इससे कुछ मदद स्वजन को मिली है।
पोस्टमार्टम के बाद शव इंदौर से गांव नयापुरा लाया गया। जैसे ही एंबुलेंस गांव में पहुंची, लोग घरों से बाहर निकल आए। कफन में लिपटी केसरबाई को देखकर परिवार का हर सदस्य टूट गया। बेटा, बेटी, पौते और पौती रोते हुए यही कहते रहे कि हमें छोड़कर क्यों चली गई। गांव की महिलाओं की आंखें भी नम हो गईं। इसके बाद गंगामहादेव में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अब तक एक ही परिवार में केसरबाई को मिलाकर सात मौते हो चुकी है। इनमें सबसे बड़ी केसरबाई थी। इससे पहले छह मौत हुई थी। मरने वाले सभी आपस में काका-बाबा के परिवार के ही है।
स्वजन ने इंदौर के अस्पताल प्रबंधन पर भी लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। केसरबाई के बेटे मगन व पोते राजपाल बताया कि रात में ही मां व दादी की मौत हो गई थी, लेकिन अगले दिन दोपहर 12 बजे तक पोस्टमार्टम नहीं किया गया। हम लगातार अस्पताल स्टाफ से प्रक्रिया जल्दी पूरी करने की बात कहते रहे, लेकिन उन्हें इंतजार करवाया जाता रहा। हमने तिरला पुलिस के माध्यम से भी फोन करवाया था, लेकिन फिर भी नहीं सूनी। करीब दो बजे पीएम हुआ। इसके बाद हम चार बजे तक गांव पहुंचे और पांच बजे गंगा महादेव में अंतिम संस्कार किया गया। उनका कहना है कि दुख की इस घड़ी में अस्पताल प्रबंधन को मानवता दिखानी चाहिए थी, लेकिन हमारी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
मृतक केसरबाई के बेट मगन ने बताया कि मां जब से हादसे का शिकार हुई थी, तभी से वह बोल नहीं पा रही थी। सिर्फ इशारों को ही समझ रही थी। मां को सिर व पेट में चोट लगी थी। साथ ही होठ भी कट गए थे। हिल भी नहीं पा रही थी, बेड पर लेटी हुई ही थी। 11 दिनों तक मां वेंटीलेटर पर थी। इस दुनिया से विदाई ली तो तब भी नहीं बोल सकी। मैं दस दिन मां के पास ही था, लेकिन परिवार में भी छह लोगों की मौत हो गई थी तो सोमवार को घाटा था, इसलिए मैं रविवार को मां के पास से घर आ गया था और रात में मां ने दम तोड़ दिया था।
नयापुरा गांव पहले से ही हादसे की वजह से सदमे में था। यहां आठ लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक ही परिवार के छह सदस्य शामिल थे। सोमवार को उन्हीं मृतकों का घाटे का कार्यक्रम था, लेकिन उसी बीच केसरबाई की मौत की खबर आ गई। इससे पूरे गांव का माहौल फिर गमगीन हो गया। नयापुरा व सेमलीपुरा में एक साथ पगड़ी का कार्यक्रम होगा। नयापुरा, सेमलीपुरा, आंबापुरा और रामपुरा गांवों में हादसे के 12 दिन बाद भी मातम पसरा हुआ है। गांव के लोग अब तक उस मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं। कई घरों में अब भी सन्नाटा है और लोग एक-दूसरे के घर जाकर स्वजन को ढांढस बंधा रहे हैं।
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