
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। 15 मई शुक्रवार का दिन धार के इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। सुबह से ही शहर का वातावरण बदला-बदला नजर आ रहा था। हर गली, हर चौक और हर चाय की दुकान पर सिर्फ एक ही चर्चा थी— भोजशाला पर आने वाले फैसले की। लोगों की निगाहें घड़ी की सुइयों पर टिकी थीं। जैसे-जैसे दोपहर आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे उत्सुकता और बेचैनी भी बढ़ती जा रही थी। दोपहर दो बजकर 34 मिनट पर जैसे ही इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच का फैसला सामने आया और हिंदू पक्ष के समर्थन की खबर भोजशाला परिसर तक पहुंची, पूरे शहर में खुशी की लहर दौड़ गई।
वर्षों से संघर्ष कर रहे सनातन समाज के लोगों की आंखों में अचानक चमक आ गई। देखते ही देखते शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से लोग भोजशाला की ओर उमड़ पड़े। कोई भगवा ध्वज लेकर दौड़ता नजर आया तो कोई मोबाइल पर अपनों को फैसले की सूचना देता दिखा। भोजशाला के बाहर स्थित ज्योति मंदिर के सामने कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजने लगी, गुलाल उड़ने लगा और ‘जय मां वाग्देवी’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। महिलाओं की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। बुजुर्ग एक-दूसरे को गले लगाकर इसे दशकों पुराने संघर्ष की जीत बता रहे थे। ऐसा माहौल बन गया मानो धार में दीपावली और होली एक साथ उतर आई हो।
भोजशाला परिसर के बाहर हर चेहरा खुशी से दमक रहा था। युवाओं ने जमकर आतिशबाजी की। बच्चों ने हाथों में भगवा ध्वज लेकर नृत्य किया। लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर मिठाइयां खिलाईं। कई लोग भावुक होकर जमीन पर बैठ गए और मां वाग्देवी का स्मरण करते नजर आए। निर्णय के बाद सबसे ज्यादा उत्साह भोजशाला के बाहर स्थित ज्योति मंदिर परिसर में दिखाई दिया। यहां हिंदू समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। ढोल की थाप पर युवक नाचते रहे, तो महिलाओं ने पारंपरिक अंदाज में मंगल गीत गाए। हर कोई एक-दूसरे को बधाई देता नजर आया। मंदिर परिसर में लगातार “जय श्रीराम”, “जय मां वाग्देवी”, “राजा भोज अमर रहें” और “जय महाकाल” के जयकारे गूंजते रहे।
लोगों में इतना उत्साह था कि एक ही दिन में शहर में होली और दीपावली जैसा नजारा देखा गया। दोपहर में लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया। इस दौरान लोग रंगों से सराबोर हो गए। ऐसा लग रहा था मानो होली हो। वहीं रात में घर-घर दीप प्रज्ज्वलित किए गए। साथ ही आतिशबाजी भी की गई। ज्योति मंदिर के सामने गुलाल का ऐसा रंग बिखरा कि पूरा परिसर भगवामय हो गया। युवक एक-दूसरे को कंधों पर बैठाकर नाचते रहे। महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। किसी ने ढोल की थाप पर नृत्य किया, तो किसी ने ताली बजाकर खुशी जाहिर की। हर तरफ गुलाल उड़ रहा था। कुछ देर के लिए ऐसा दृश्य बन गया मानो पूरा धार शहर होली मना रहा हो।
इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान भोज उत्सव समिति के सदस्य मौजूद थे। जैसे ही वे शाम को धार पहुंचे, भोजशाला परिसर के बाहर उनका स्वागत किया गया। इसमें गोपाल शर्मा, अशोक जैन, विश्वास पांडे, मातृशक्ति ने आरती उतारी, तिलक लगाया और फूल-मालाओं से अभिनंदन किया। महिलाओं ने मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कई महिलाएं भावुक हो गईं। शाम को भोज उत्सव समिति के सदस्य ज्योति मंदिर पहुंचे। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने अखंड ज्योति की आरती की और दीप प्रज्ज्वलित किए। आरती के दौरान पूरा परिसर मां वाग्देवी के जयघोष से गूंज उठा।
फैसले के बाद बड़ी संख्या में लोग भोजशाला के बाहरी प्रवेश द्वार तक पहुंचे। समाज के लोगों ने संयम बनाए रखा। उनका कहना था कि जब तक लिखित आदेश नहीं आ जाता, तब तक वे परिसर के भीतर प्रवेश नहीं करेंगे। इसके बाद लोगों ने भोजशाला के बाहरी गेट को मां वाग्देवी के चरण मानकर वहीं फूल-मालाएं अर्पित कीं। फैसले के बाद हिंदू समाज के लोगों ने संकल्प लिया कि अब मां वाग्देवी की मूर्ति को लंदन से वापस लाकर भोजशाला में स्थापित किया जाएगा। कई लोगों ने कहा कि यह संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि अब अगला लक्ष्य मां वाग्देवी की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा है।
यह भी पढ़ें- खुशियों में डूबा धार... दिन में होली, रात में मनी दीपावली, भोजशाला परिसर में उमड़ा जनसैलाब
फैसले को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। धार जिले सहित आसपास के जिलों से करीब दो हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। शहर के प्रमुख चौराहों, भोजशाला परिसर और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बल मौजूद रहा। पूरे दिन ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। पुलिस की मोबाइल टीमें लगातार गश्त करती रहीं। कलेक्टर राजीव रंजन मीणा, डीआईजी मनोज कुमार सिंह, एसपी सचिन शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भोजशाला परिसर में मौजूद रहे। प्रशासन ने हर गतिविधि पर नजर बनाए रखी। इधर, पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।