
नईदुनिया न्यूज, डही, धार। भीषण गर्मी में 42 डिग्री तापमान के बीच मई के दूसरे सप्ताह में नर्मदा का जलस्तर सुखद तस्वीर पेश कर रहा है। इससे नर्मदा के पानी पर आश्रित लाखों आबादी को जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ रहा है। नर्मदा का जलस्तर 129.48 मीटर पर है, जो अब भी खतरे के निशान से छह मीटर ज्यादा है।
नर्मदा नदी में 123 मीटर का जलस्तर खतरे का निशान माना जाता है। बात की जाए पिछले तीन वर्षों की तो इस बार मई के दूसरे सप्ताह में नर्मदा में सर्वाधिक पानी है। नौ मई 2025 को नर्मदा का जलस्तर 123.280 मीटर पर था, जबकि नौ मई 2024 को 120 मीटर पर था।
हालांकि मई की शुरुआत में नर्मदा का जलस्तर 130 मीटर से अधिक बना हुआ था, जो अब एक से डेढ़ मीटर कम हुआ है। एक मीटर जल स्तर कम होने पर कई लोग नर्मदा में जल क्रीड़ा करने भी पहुंच रहे हैं, लेकिन यह खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि नर्मदा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से बहुत ज्यादा ऊपर है।
विकासखंड डही के ग्राम किकरवास, धरमराय, कष्टा, छाछकुआं, कातरखेड़ा, दसाना और दभानी में नर्मदा नदी बहती है। इन गांवों में अभी भी सरदार सरोवर का बैकवाटर दूर-दूर तक मौजूद है। वहीं दभानी से आगे पड़ोसी आलीराजपुर जिले के ग्राम ककराना में नर्मदा नदी प्रवेश करती है।
यहां से झंडाना, भिताड़ा होते हुए नर्मदा नदी गुजरात में पहुंचती है। डही से लेकर आलीराजपुर के ककराना तक नर्मदा नदी के जलस्तर की निगरानी और आधिकारिक मापन की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बड़वानी जिले के राजघाट से जारी बुलेटिन के आंकड़े को ही नर्मदा का जलस्तर माना जाता है।
दूसरी तरफ मई में नर्मदा का जलस्तर अच्छा होने से सबसे बड़ा लाभ डही, कुक्षी और निसरपुर जैसे बड़े कस्बों के लोगों को मिल रहा है, क्योंकि यहां नर्मदा से ही पानी आता है। दूसरी तरफ फ्लोराइड मुक्त नर्मदा जल परियोजना भी संचालित है। इससे डही, कुक्षी और अन्य तहसील के 178 गांव के ग्रामीणों की भी प्यास बूझ रही है।
वर्ना कई बार मई महीने में गर्मी के दिनों में नर्मदा का जलस्तर कम हो जाने से इंटेकवेल से पानी दूर हो जाता था और ऐसे में नाली बनाकर पानी लाना पड़ता था, जिससे नर्मदा पर आश्रित जल परियोजनाओं के बाद भी लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस बार तस्वीर काफी सुखद है।