
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में सक्रिय मौसमी सिस्टम के चलते मौसम ने अचानक करवट ले ली है। गुरुवार को वर्ष प्रतिपदा के दिन प्रदेश के करीब 33 जिलों में बादल छाए रहे और कई जगहों पर बूंदाबांदी के साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। मौसम विभाग ने 22 मार्च तक बारिश, तेज हवा और ओलों की चेतावनी जारी की है।
इन जिलों में बारिश और ओले
खंडवा, बुरहानपुर, कटनी और अनूपपुर जिलों में बारिश हुई, जबकि खंडवा, अनूपपुर, धार के बदनावर और बैतूल के मुलताई क्षेत्र में हल्की बारिश के साथ ओले भी गिरे। मालवा-निमाड़ के झाबुआ, आलीराजपुर और रतलाम जिलों में भी मौसम बदला रहा।
22 मार्च तक अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार आगामी दिनों में भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में वर्षा, झंझावात और ओलावृष्टि की स्थिति बनी रह सकती है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
फसलों पर खतरा
इस मौसम बदलाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में खड़ी गेहूं और लहसुन की फसल को तेज हवा, बारिश और ओलों से नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
बदनावर में बारिश
बदनावर में गुरुवार शाम अचानक बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। तेज गर्मी के बाद शाम करीब 5:45 बजे गरज-चमक के साथ शुरू हुई बारिश कुछ ही देर में तेज वर्षा में बदल गई। इस दौरान मक्का और चने के आकार के ओले गिरने से हजारों बीघा फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
आधे घंटे की बारिश, ओलावृष्टि से नुकसान
तेज हवा और बिजली की चमक के साथ करीब आधे घंटे तक बारिश हुई। बेमौसम वर्षा के साथ गिरे ओलों ने खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा लहसुन की फसल पर भी असर पड़ने की संभावना है।
कटाई के बीच मौसम ने बढ़ाई परेशानी
इस समय क्षेत्र में फसल कटाई का दौर चल रहा है। ऐसे में अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का खतरा बढ़ा दिया है। खेतों में रखी फसल के भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
मंडी और मेले पर भी असर
अनाज मंडी में खुले में रखी उपज को बचाने के लिए व्यापारियों को भागदौड़ करनी पड़ी। वहीं नगर में चल रहे बैजनाथ मेले पर भी मौसम का असर पड़ा और लोगों की आवाजाही कम हो गई।
गेहूं की गुणवत्ता पर पड़ेगा असर
कृषि विभाग के अनुसार क्षेत्र में करीब 59,600 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई थी, जिसमें 60-70 प्रतिशत कटाई हो चुकी है। बारिश के कारण खेतों में पड़ी फसल भीगने से गेहूं की चमक और गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिससे किसानों को उचित दाम मिलने में परेशानी हो सकती है।
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