
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के लिए नया मोड़ आया है। डेकाकुंड-टांडा रोड रेलखंड पर पहली बार 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से रेलवे इंजन (लोको) दौड़ाया गया। पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुए इस हाई-स्पीड ट्रायल के साथ ही क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की गई है।
सोमवार को आयोजित यह स्पीड ट्रायल प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता श्री रजनीश कुमार गोयल के नेतृत्व और निरीक्षण में पूरा हुआ। इस दौरान 120 किमी/घंटा की गति से लोको चलाकर रेलपथ (ट्रेक) की मजबूती, सिग्नलिंग सिस्टम, ओवरहेड बिजली आपूर्ति (OHE) और संरक्षा से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई। विशेष रूप से आरकेएम 15.68 पर तकनीकी दल ने निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया कि सभी प्रणालियां निर्धारित रेलवे मानकों के अनुसार कार्य कर रही हैं।
डेकाकुंड-टांडा रोड रेलखंड शुरू होने से धार जिले के पश्चिमी अंचल को गुजरात के साथ सीधा और सुगम रेल संपर्क मिलेगा। इससे न केवल स्थानीय ग्रामीणों की सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी, बल्कि क्षेत्र में व्यापार, रोजगार, चिकित्सा और शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय निवासियों के लिए यह परियोजना विकास का नया अध्याय साबित होगी
रेलखंड पर ओवरहेड electrification (विद्युत कार्य) बीकानेर की जगदंबा इंजीनियर्स एंड बिल्डर्स द्वारा किया गया है। परीक्षण के दौरान बिजली व्यवस्था की क्षमता और निरंतरता को परखा गया, जो पूरी तरह खरी उतरी। इस कार्य को समय सीमा और तकनीकी मानकों के अनुसार पूरा करने में बड़ौदा बिजली विभाग के रेलवे निर्माण दल, अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, सफल स्पीड ट्रायल के बाद अब परिचालन संबंधी अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यदि सभी कार्य इसी गति से आगे बढ़ते रहे, तो दिसंबर 2026 तक डेकाकुंड से टांडा रोड के बीच यात्री ट्रेनों की आवाजाही शुरू होने की पूरी संभावना है।