
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार : धार की ऐतिहासिक भोजशाला में गुरुवार को साध्वी ऋतंभरा पहुंचीं। उन्होंने मां वाग्देवी की आरती की और आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभा आयोजित की गई।
सभा को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि भोजशाला को लेकर वर्षों से चला संघर्ष अब सफलता तक पहुंचा है और यह केवल एक स्थान की जीत नहीं, बल्कि सत्य की विजय है।
उन्होंने कहा कि भोजशाला की विजय ने कृष्ण जन्मभूमि का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया है। वर्षों तक समाज ने धैर्य, संघर्ष और संकल्प के साथ इस विषय को आगे बढ़ाया। मां वाग्देवी स्वयं धार नगरी आना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी का एक वर्ग अपशब्दों और अपसंस्कृति की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में मां वाग्देवी अधीर होकर कह रही हैं कि "मुझे लंदन से चलकर धार आना ही होगा, क्योंकि मैं भारत को भारत बनाए रखना चाहती हूं।" मां वाग्देवी जल्द ही धार नगरी में विराजमान होंगी।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि मालवा की मिट्टी में अद्भुत आकर्षण है। जरा सी वर्षा होने पर यहां की काली मिट्टी पैरों को पकड़ लेती है, उसी तरह मालवा के लोगों का स्नेह भी हर किसी को अपना बना लेता है। मालवा धर्म के प्रति आग्रह रखने वाली भूमि है और आने वाले समय में भोजशाला विश्वभर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। दुनिया भर से लोग मां वाग्देवी के दर्शन करने और धार नगरी को देखने आएंगे।
उन्होंने कहा कि वर्षों पुराने शिलालेख और पत्थरों ने अपना इतिहास स्वयं बताया है। लंबे संघर्ष और अपमान सहने के बाद भी हिंदू समाज ने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि उन्हें मां वाग्देवी के गर्भगृह में खड़े होकर पूरे देश को ये संदेश देने का अवसर मिला कि हमारी संताने संस्कारी बनें, समाज में शांति और समृद्धि आए तथा देश का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथ में रहे जो सनातन संस्कृति का सम्मान करते हों।
साध्वी ऋतंभरा ने धारवासियों से आह्वान किया कि वे एक-दूसरे को केवल सलाह नहीं, बल्कि साथ दें। समाज की यही एकजुटता भारत को उसकी सांस्कृतिक पहचान के साथ आगे बढ़ाएगी।
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