डिंडौरी: फर्जी नामांतरण करने वाले पटवारी, तहसीलदार सहित दो अन्य पर दर्ज होगी एफआईआर
तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामें और तत्कालीन पटवारी डिंडौरी हिरेंद्र सूर्याम ने साठगांठ कर जिला मुख्यालय की पैतृक जमीन में यह खेल किया गया। आवासीय औ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 07:12:56 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 07:16:28 PM (IST)
एफआईआर।HighLights
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामला दर्ज करने का जारी किया आदेश
- मामला जिला मुख्यालय की पैतृक जमीन हड़पने के लिए फर्जी नामांतरण का
- आवासीय और व्यावसायिक जमीन को कृषि में बदलकर कर बेच दी गई जमीन
नईदुनिया प्रतिनिधि, डिंडौरी। जिला मुख्यालय में करोडों की बेशकीमती जमीन का फर्जी नामांतरण करने वाले तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार सहित दो अन्य के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी हुए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरजेश कुमार सनोडिया की अदालत ने कोतवाली पुलिस को संबंधितों के विरूद्ध मामला दर्ज कर एफआईआर की प्रति न्यायालय में देने के आदेश जारी किए हैं।
तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामें और तत्कालीन पटवारी डिंडौरी हिरेंद्र सूर्याम ने साठगांठ कर जिला मुख्यालय की पैतृक जमीन में यह खेल किया गया। आवासीय और व्यावसायिक जमीन को कृषि में बदलकर कर पहले उसका नामांतरण कर दिया और उसके बाद उस जमीन की करोडों में बिक्री भी हो गई।
बडी मनमानी यह भी हुई कि संबंधित जमीन का मामला हाईकोर्ट में लंबित था। स्थगन आदेश के बाद भी तहसील न्यायालय से आदेश जारी होने पर गंभीर सवाल खडे हो रहे हैं। इस मामले में जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक चार निवासी इंद्रपाल सोनपाली ने नौ जनवरी 2023 को कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
तब पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया। पीडित को मजबूरन न्यायालय की शरण लेनी पडी। पीडित इंद्रपाल सोनपाली की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता पीएन राय ने बताया कि इस मामले में पुलिस को उसी समय मामला दर्ज करना चाहिए थो।
फर्जी वसीयत से शुरू हुआ था खेल
- पैतृक जमीन को हड़पने के लिए फर्जी वसीयत, कूटरचित शपथपत्र और अवैध नामांतरण का बड़ा मामला चर्चाओं में आ गया है।
- डिंडौरी निवासी इन्द्रपाल सोनपाली ने अपने ही चाचा नंदलाल सोनपाली, चचेरे भाई रोहित सोनपाली के साथ-साथ हल्का पटवारी और तत्कालीन तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सिटी कोतवाली में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डिंडौरी ने 11 जून को इस मामले में धारा 156(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
- बताया गया कि पीडित इन्द्रपाल सोनपाली के दादा स्व. बालमुकुंद सोनपाली का निधन वर्ष 1989 में हो गया था। उनकी समस्त चल-अचल संपत्ति डिंडौरी नगर और आसपास के ग्रामों में है।
- दादा की मृत्यु के बाद संपत्ति बंटवारे को लेकर परिवार में विवाद हुआ। व्यवहार प्रकरण डिंडौरी न्यायालय में चला, जिसकी अपील उच्च न्यायालय जबलपुर में 2006 से विचाराधीन है।\B
हाईकोर्ट के स्थगन के बावजूद हुई बिक्री
- पीडित ने आरोप लगाया कि संबंधित जमीन के मामले में उच्च न्यायालय ने 07 मई 2007 को स्थगन आदेश पारित किया था कि नंदलाल सोनपाली, अनंतराम सोनपाली, मृत सुदेशपाल सोनपाली और मृत कमलेश सोनपाली अपील के निराकरण तक स्व. बालमुकुंद सोनपाली की समस्त संपत्ति का विक्रय नहीं कर सकेंगे।
- इसके बावजूद आरोप है कि नंदलाल सोनपाली ने फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन अपने नाम करा ली। पीडित के अनुसार, डिंडौरी नगर में वार्ड पांच स्थित 3.245 हेक्टेयर पैतृक भूमि पर मकान, कुआं और बगीचा है।
- नंदलाल सोनपाली ने फर्जी वसीयत के आधार पर तहसीलदार के मनमानी आदेशसे 04 जुलाई 2022 से यह जमीन अपने नाम करवा ली।
- 05 अगस्त 2022 को पुत्र रोहित सोनपाली को दानपत्र से हस्तांतरित कर दी।
- इसी तरह सुखवार वार्ड एक स्थित खसरा नंबर 104, रकबा 3.5450 हेक्टेयर भूमि भी फर्जी वसीयत से अपने नाम करवाकर मनमानी पूर्वक डिंडौरी निवासी अनिल खनूजा को बेच दी गई।
कूटरचित शपथपत्र का आरोप
- पीडित ने आरोप लगाया कि दोनों नामांतरण प्रकरणों में एक जून 2022 और 20 जून 2022 को उसके कूटरचित हस्ताक्षर कर शपथपत्र तैयार किए गए।
- उसमें लिखा गया कि इन्द्रपाल को नंदलाल सोनपाली के नाम पर नामांतरण से कोई आपत्ति नहीं है। पीडित का कहना है कि वह कभी तहसीलदार के समक्ष उपस्थित ही नहीं हुआ और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाकर फर्जीवाड़ा किया गया।
- इस मामले में हल्का पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंद राम सलामे पर अनावेदक नंदलाल और रोहित सोनपाली के साथ मिलकर दस्तावेजों की कूटरचना करने का आरोप लगाया है।
- आरोप है कि दोनों नामांतरण प्रकरणों की फाइलें पटवारी और तहसीलदार ने अपने पास रखीं। जब प्रतिलिपि मांगी गई तो 27 दिसंबर 2022 को फाइल तहसील कार्यालय को दी गई।
- बताया गया कि वार्ड पांच की भूमि परिवर्तित भूमि थी, जिसे पटवारी और तहसीलदार ने राजस्व अभिलेखों से परिवर्तित श्रेणी से हटा दिया ताकि बिना कलेक्टर की अनुमति के हस्तांतरण हो सके।
- दानपत्र में यह भी गलत लिखा गया कि भूमि पर मकान, कुआं या वृक्ष नहीं हैं। आवेदन में कहा गया है कि वसीयतकर्ता स्व. लीलावती सोनपाली का निधन वर्ष 2001 में हो चुका था।
- वसीयत को 21 साल बाद नामांतरण के लिए पेश किया गया और बिना वारिसानों को नोटिस दिए नामांतरण कर दिया गया।
न्यायालय से संबंधितों के विरूद्ध मामला दर्ज करने का आदेश हुआ है। आदेश की कापी मिल गई है। इस मामले में न्यायाधीश के समक्ष उपस्थित होकर कुछ और निर्देश लेना है। आवश्यक दस्तावेज पूरे कर शीघ्र ही इसमें मामला दर्ज किया जाएगा। इसको मैं प्राथमिकता से दिखवाता हूं।
दुर्गा प्रसाद नगपुरे, कोतवाली प्रभारी डिंडौरी