
नईदुनिया प्रतिनिधि डिंडोरी। कोतवाली थाना क्षेत्र के किसलपुरी गांव में बुधवार सुबह एक युवक ने सल्फास की गोली खाई और सो रहे पिता को जगाकर इसकी जानकारी दी।
आनन-फानन में परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक के पिता ने बहू पर बेटे को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
सौरभ पाठक, उम्र 30 वर्ष, पिता सतीश पाठक, निवासी किसलपुरी बुधवार सुबह रोज की तरह 5 बजे उठकर मार्निंग वॉक पर गया था। लौटने के बाद वह घर के पास स्थित होटल में चाय पीने भी गया।
चाय पीकर घर आने के बाद उसने कमरे में जाकर सल्फास की गोली खा ली। इसके बाद उसने सो रहे पिता सतीश पाठक को उठाया और कहा, "पापा, मैंने जहर खा लिया है।"
परिजन तुरंत उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची सिटी कोतवाली पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर मर्ग कायम कर लिया है।
आरोप है कि शादी के बाद से ही बहू सौरभ को प्रताड़ित करती थी। 3 मई 2026 को काजल ने अपने भाई को बुलाकर मायके चली गई और फिर वापस नहीं लौटी।
सतीश पाठक ने बताया, हमने सोचा कुछ दिन में मान जाएगी। बेटे ने बताया कि वो आने से मना कर रही है। मैंने समधी से बात की तो उन्होंने कहा कि एक साल तक बेटी को नहीं भेजेंगे, वो पढ़ाई कर रही है। हमने कहा कि पढ़ना है तो हमारे घर से पढ़ा देंगे, लेकिन वो नहीं माने।
पिता ने बताया कि बेटा भी परेशान हो गया था और एक दिन उसने कहा भी था कि "तलाक दे देते हैं।" मैंने उसे समझाया था कि कुछ दिन में वापस आ जाएगी।
मृतक के घर के सामने चाय की दुकान चलाने वाले गंगा बर्मन ने बताया, "सौरभ रोज सुबह 5 बजे वॉक पर जाता था। आज भी गया था। लौटकर आया और पूछा चाय बन गई क्या?
मैंने कहा दुकान अभी खोली है, थोड़ा टाइम लगेगा। इसके बाद वो बगल की दुकान पर चाय पीकर घर चला गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि वो ऐसा कदम उठा लेगा।
सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच मोबाइल पर क्या बातचीत होती थी, इसका पता लगाने के लिए सौरभ के मोबाइल की कॉल डिटेल और व्हाट्सएप चैटिंग खंगाली जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। उनका कहना है "इकलौता बेटा था, उसे पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया, लेकिन वो भी हमें छोड़कर चला गया।
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