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कीट पकड़ो, पैसे कमाओ! डिंडौरी के जंगलों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने पकड़े 10 लाख साल बोरर कीड़े, खाते में आएंगे लाखों रुपये

ट्रैप ट्री ऑपरेशन 20 जून 2026 से 30 जुलाई 2026 तक चलाया जा रहा है। इस तकनीक में बारिश के समय 2 हेक्टेयर क्षेत्र में एक स्वस्थ साल के पेड़ को काटकर उसक...और पढ़ें

By Ashish ShuklaEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 04:52:44 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 04:52:44 PM (IST)
कीट पकड़ो, पैसे कमाओ! डिंडौरी के जंगलों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने पकड़े 10 लाख साल बोरर कीड़े, खाते में आएंगे लाखों रुपये
ट्रैप ट्री ऑपरेशन से अब तक 10 लाख से अधिक कीट पकड़े गए

HighLights

  1. जिले के जंगलो में साल बोरर कीट का प्रकोप
  2. 30,487 हेक्टेयर वन क्षेत्र इस कीट से प्रभावित
  3. ट्रैप ट्री ऑपरेशन से अब तक 10 लाख से अधिक कीट पकड़े गए

नईदुनिया प्रतिनिधि, डिंडौरी। सामान्य वनमंडल डिण्डौरी के अंतर्गत परिक्षेत्र पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया एवं दक्षिण समनापुर में इस वर्ष 2026-27 में साल के वृक्षों में साल बोरर कीट का व्यापक प्रकोप देखा गया है। वन विभाग के सर्वे में लगभग 30,487 हेक्टेयर वन क्षेत्र और 1.47 लाख साल के वृक्ष इस कीट से प्रभावित पाए गए हैं। साल बोरर कीट साल के तनों में छेद कर अंदर घुस जाता है, जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूखकर नष्ट हो जाते हैं। कीट के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर से प्राप्त निर्देशों और स्वीकृत कार्ययोजना के अनुसार वन विभाग द्वारा "ट्रैप ट्री ऑपरेशन" चलाया जा रहा है।

20 जून से चल रहा ट्रैप ट्री ऑपरेशन

वनमंडल अधिकारी के अनुसार ट्रैप ट्री ऑपरेशन 20 जून 2026 से 30 जुलाई 2026 तक चलाया जा रहा है। इस तकनीक में बारिश के समय 2 हेक्टेयर क्षेत्र में एक स्वस्थ साल के पेड़ को काटकर उसकी छाल को पीटकर छोड़ दिया जाता है। कटे हुए पेड़ से निकलने वाले रस की गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट उस पर एकत्रित हो जाते हैं। प्रतिदिन सुबह 5 बजे से 7 बजे के बीच ग्रामीणों द्वारा इन पेड़ों पर बैठे कीटों को पकड़कर एकत्र किया जा रहा है। पकड़े गए कीटों की माला बनाकर उन्हें ग्राम स्तर पर बनाए गए संग्रहण केंद्रों में जमा किया जा रहा है।


ग्रामीणों को मिला रोजगार, 10 लाख से अधिक कीट पकड़े

कीट नियंत्रण के इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। वनमंडल अंतर्गत खारिडीह, चौरादादर, कबीर, जगतपुर और करंजिया में 5 साल बोरर कीट संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। ग्रामीण प्रतिदिन इन केंद्रों में कीटों की माला जमा कर रहे हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी तक ग्रामीणों द्वारा 10 लाख से अधिक साल बोरर कीट पकड़े जा चुके हैं। इस वर्ष प्रति कीट पकड़ने की दर 2 रुपये निर्धारित की गई है। पकड़े गए कीटों के आधार पर भुगतान सीधे ग्रामीणों के बैंक खातों में किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है और कीट नियंत्रण में भी मदद मिल रही है।

प्रभावित पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा

वन अधिकारियों ने बताया कि साल बोरर से गंभीर रूप से प्रभावित पेड़ों की पहचान कर ली गई है। इन पेड़ों की कटाई कर संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को अनुमति हेतु भेज दिया गया है। अनुमति प्राप्त होते ही प्रभावित क्षेत्रों में कटाई कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा, ताकि स्वस्थ पेड़ों को बचाया जा सके।

क्या है साल बोरर?

साल बोरर Hoplocerambyx spinicornis साल वनों का प्रमुख कीट है। यह मानसून के समय सक्रिय होता है और कमजोर या तनावग्रस्त पेड़ों पर हमला करता है। एक बार पेड़ में प्रवेश करने के बाद यह तने के अंदर सुरंग बनाकर लकड़ी को खोखला कर देता है, जिससे पेड़ कुछ महीनों में सूख जाता है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह पूरे क्षेत्र के वन को नुकसान पहुंचा सकता है।

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वन विभाग की अपील

वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे वन क्षेत्रों में साल बोरर के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी वन कार्यालय को सूचित करें। साथ ही ट्रैप ट्री ऑपरेशन में ग्रामीणों से सहयोग की अपेक्षा की गई है। विभाग का मानना है कि जनसहभागिता से ही इस कीट के प्रकोप पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है और डिण्डौरी के साल वनों को बचाया जा सकता है।