कोरोना में शादी कैंसल होने पर जीवाजी क्लब को लौटाने होंगे 1.08 लाख रुपये, उपभोक्ता फोरम का आदेश
आयोग ने अपने आदेश में माना कि विवाह आयोजन परिवादी की किसी गलती के कारण निरस्त नहीं हुआ, बल्कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी और सरकारी प्रतिबंधों के कारण ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 22 May 2026 08:58:06 AM (IST)Updated Date: Fri, 22 May 2026 08:58:35 AM (IST)
सोशल मीडियाHighLights
- जिला उपभोक्ता आयोग ने क्लब की दलीलों को किया खारिज
- क्लब को मानसिक क्षतिपूर्ति और कोर्ट खर्च भी देने के निर्देश
- 45 दिन में भुगतान न करने पर लगेगा 6% ब्याज
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने कोरोना महामारी के दौरान निरस्त हुई शादी के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जीवाजी क्लब को उपभोक्ता को 1 लाख आठ हजार रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने क्लब द्वारा पूरी अग्रिम राशि रोकने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है।
बहन की शादी के लिए कंपू के राकेश ने बुक कराया था गार्डन
प्रकरण के अनुसार कंपू निवासी राकेश सिंह राजपूत ने अपनी बहन के विवाह के लिए तीन दिसंबर 2020 को जीवाजी क्लब का गार्डन नंबर-तीन बुक कराया था। विवाह समारोह सात मई 2021 को होना तय था, जिसके लिए उन्होंने एक लाख 28 हजार रुपये अग्रिम राशि जमा की थी। लेकिन कोरोना संक्रमण और सरकारी प्रतिबंधों के कारण विवाह आयोजन नहीं हो सका।
इसके बाद परिवादी ने क्लब से राशि वापस मांगी, लेकिन क्लब प्रबंधन ने भुगतान करने से इन्कार कर दिया। परिवादी ने अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजकर राशि वापसी की मांग की थी। इसके बावजूद भुगतान नहीं मिलने पर मामला जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान क्लब की ओर से तर्क दिया गया कि बुकिंग के समय ही शर्तों में स्पष्ट कर दिया गया था कि कोरोना जैसी परिस्थितियों में कार्यक्रम निरस्त होने पर अग्रिम राशि वापस नहीं की जाएगी और परिवादी ने इस शर्त को स्वीकार करते हुए हस्ताक्षर किए थे।
आयोग ने अपने आदेश में माना कि विवाह आयोजन परिवादी की किसी गलती के कारण निरस्त नहीं हुआ, बल्कि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी और सरकारी प्रतिबंधों के कारण कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका। आयोग ने यह भी कहा कि महामारी जैसी असाधारण परिस्थिति में पूरी राशि रोक लेना मानवीय संवेदनाओं के विपरीत है और यह एकतरफा एवं अनुचित व्यापार व्यवहार को दर्शाता है।
आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा की पीठ ने आदेश दिया कि क्लब एक लाख 28 हजार रुपये में से अधिकतम 20 हजार रुपये कटौती कर शेष एक लाख आठ हजार रुपये 45 दिनों के भीतर लौटाए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। साथ ही परिवादी को मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में तीन हजार रुपये और वाद व्यय के लिए दो हजार रुपये देने के निर्देश भी दिए गए हैं।