मंगलवार से चरमरा सकती है स्वास्थ्य व्यवस्था! मध्य प्रदेश के 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी जाएंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
लंबित मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी मंगलवार दो जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 01 Jun 2026 09:42:20 PM (IST)Updated Date: Mon, 01 Jun 2026 09:43:01 PM (IST)
लंबित मांगों को लेकर दो जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू( एआई फोटो)HighLights
- लंबित मांगों को लेकर दो जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू
- प्रदेशभर के करीब 32 हजार कर्मचारी आंदोलन में शामिल होंगे
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सेवाएं प्रभावित होने की आशंका
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। लंबित मांगों को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी मंगलवार दो जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। हड़ताल के पहले दिन कर्मचारी पड़ाव स्थित मंशापूर्ण हनुमान मंदिर पर एकत्रित होकर आंदोलन का शंखनाद करेंगे। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल तक स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है।
कर्मचारियों की महापंचायत आयोजित की गई थी
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष धर्मवीर शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में संविदा कर्मचारियों की महापंचायत आयोजित की गई थी। इस दौरान संविदा कर्मचारियों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई थीं। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा संविदा नीति भी जारी की गई, लेकिन आज तक उसका पालन नहीं हो सका है।
उन्होंने बताया कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर एक वर्ष पूर्व सहमति बनी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है। इसी के चलते संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश की कार्यसमिति के निर्णय के अनुसार प्रदेशभर के लगभग 32 हजार कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन के तहत अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं।
इन स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
संजीवनी क्लिनिक सेवाएं
टीबी नियंत्रण कार्यक्रम
बच्चों का नियमित टीकाकरण
आयुष्मान आरोग्य केंद्रों की सेवाएं
एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) की व्यवस्थाएं
एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) की सेवाएं
संघ का कहना है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग के सामने आवश्यक सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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