
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गजराराजा मेडिकल कॉलेज (जीआरएमसी) में जल्द ही अंग प्रत्यारोपण (आर्गन ट्रांसप्लांट) के क्षेत्र में बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है। कालेज में ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) लैब की स्थापना अंतिम चरण में पहुंच गई है। लैब शुरू होने के बाद किडनी, लीवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट से पहले होने वाली सबसे महत्वपूर्ण एचएलए मैचिंग जांच ग्वालियर में ही उपलब्ध होगी। इससे मरीजों को दिल्ली, भोपाल या अन्य बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
वर्तमान में ग्वालियर-चंबल अंचल के मरीजों के सैंपल एचएलए जांच के लिए दिल्ली, भोपाल और अन्य बड़े केंद्रों पर भेजे जाते हैं। रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं, जिससे अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में देरी होती है। कई बार मरीजों और उनके स्वजन को अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। लैब शुरू होने के बाद जांच स्थानीय स्तर पर होगी, जिससे समय और खर्च दोनों में कमी आएगी।
जीआरएमसी प्रशासन ने लैब के लिए आवश्यक मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली है। तकनीकी संसाधनों और विशेषज्ञ स्टाफ की व्यवस्था पर भी तेजी से काम चल रहा है। अब केवल जांच शुल्क (रेट) को अंतिम रूप देकर कालेज काउंसिल की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाना है। स्वीकृति मिलते ही लैब का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
एचएलए लैब की शुरुआत का सीधा लाभ सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में प्रस्तावित किडनी ट्रांसप्लांट सेवा को भी मिलेगा। अभी तक स्थानीय स्तर पर इस जांच की सुविधा नहीं होने के कारण ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू करने में कई तकनीकी अड़चनें थीं। लैब शुरू होने के बाद यह बाधा दूर हो जाएगी और ग्वालियर में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्वालियर-चंबल संभाग और आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। इससे जीआरएमसी मध्य भारत में ट्रांसप्लांट सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, एचएलए टेस्ट यह निर्धारित करता है कि अंगदाता और मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) एक-दूसरे के कितने अनुकूल हैं। यदि मैचिंग बेहतर होती है तो प्रत्यारोपित अंग के सफल रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है और शरीर द्वारा अंग को अस्वीकार (रिजेक्शन) करने का खतरा कम हो जाता है। यही कारण है कि किसी भी किडनी, लीवर या बोन मैरो ट्रांसप्लांट से पहले यह जांच अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
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एचएलए लैब की स्थापना की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आवश्यक मशीनें आ चुकी हैं। जांच की दरें तय कर ली हैं उन्हें कालेज काउंसिल की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही लैब शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जीआरएमसी, जेएएच