साइबर ठगों का नया पैंतरा: पुलिस से बचने के लिए तैनात किए 'हैंडलर', APK फाइल से चुरा रहे OTP
Gwalior Cyber Police News: इस काम के लिए बाकायदा तकनीकी रूप से दक्ष युवकों और बीई-बीटेक पास इंजीनियरों को भर्ती किया जा रहा है। ये हैंडलर दूर-दराज के ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 10:47:53 AM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 10:48:32 AM (IST)
HighLights
- B.E-B.Tech पास युवाओं की भर्ती
- स्क्रीन शेयरिंग से पा रहे OTP का एक्सेस
- म्यूल खातों से तुरंत रकम ट्रांसफर
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। देश भर में म्यूल खातों (किराये के बैंक खाते) के खिलाफ मध्य प्रदेश पुलिस और अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा चलाए गए ताबड़तोड़ अभियानों के बाद साइबर अपराधियों ने ठगी का नया और बेहद शातिर तरीका ढूंढ निकाला है। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए ठगों के सिंडिकेट ने अब एक कदम आगे बढ़ाते हुए 'हैंडलर' तैनात करना शुरू कर दिया है।
इस काम के लिए बाकायदा तकनीकी रूप से दक्ष युवकों और बीई-बीटेक पास इंजीनियरों को भर्ती किया जा रहा है। ये हैंडलर दूर-दराज के राज्यों में बैठकर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और बैंक खातों को आपरेट करते हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंट से 21.05 करोड़ की ठगी में पकड़ा गया हैंडलर
हाल ही में चार्टर्ड अकाउंटेंट से 21.05 करोड़ रुपये की ठगी हुई। पुलिस जांच में जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो पहली बार इस हाई-टेक 'हैंडलर नेटवर्क' की पोल खुली और पुलिस ने हैंडलर अंकित वर्मा को पकड़ा। इसी ने शाजापुर के जिपं सदस्य जगदीश कुमार मालवीय का खाता हैंडल किया था। ठगी के 50 लाख रुपये आते ही दूसरे म्यूल खातों में रुपया ट्रांसफर किया।
नेटवर्क में ही उलझ रही पुलिस
यह शातिर हैंडलर एपीके फाइल के जरिए ओटीपी अपने मोबाइल पर मंगवाते हैं। ऐसे में पुलिस नेटवर्क में ही उलझी रहती है। यह लोग रुपया एक खाते से आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
कैसे काम करता है ठगी का यह 'स्मार्ट' मॉडल?
इस नए मॉडल में खाताधारक (जिसके नाम पर म्यूल अकाउंट है) को सीधे तौर पर कोई तकनीकी काम नहीं करना पड़ता। यह पूरा नेटवर्क बेहद स्मार्ट तरीके से चलता है, जिससे पुलिस को उलझाया जा सके।
- मूल दस्तावेज पास, कंट्रोल दूर: खाताधारक के पास केवल उसका एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक रहती है।
- एपीके फाइल से स्क्रीन शेयरिंग: हैंडलर पीड़ित या खाताधारक के फोन में एपीके फाइल भेजकर स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करवा देते हैं। स्क्रीन शेयरिंग के जरिए हैंडलर के पास फोन में आने वाले हर ओटीपी का सीधा एक्सेस होता है।
- धन की तुरंत हेराफेरी: जैसे ही ठगी का रुपया उस म्यूल खाते में आता है, दूसरे राज्य में बैठा हैंडलर बिना देरी किए उस राशि को कई अन्य 'मल्टीपल' खातों में ट्रांसफर कर देता है।
- कमीशन का तुरंत भुगतान: लेन-देन पूरा होते ही खाताधारक का तय कमीशन (हिस्सा) उसी खाते में छोड़ दिया जाता है, जिसे वह एटीएम से आसानी से निकाल लेता है।