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सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद, कोर्ट में पेश हुआ 1000 पन्नों का रिकॉर्ड, अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को

संपत्ति विवाद से संबंधित लगभग 1000 पन्नों का रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। इस रिकॉर्ड में पूर्व की कार्यवाही, दावा-आपत्ति, फैमिली सेटलमेंट स...और पढ़ें

By Vikram Singh TomarEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 07:37:58 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 07:37:58 PM (IST)
सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद, कोर्ट में पेश हुआ 1000 पन्नों का रिकॉर्ड, अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को
सिंधिया संपत्ति विवाद में 1000 पन्नों का रिकार्ड कोर्ट में पेश।

HighLights

  1. पद्माराजे की बेटी की कैविएट पर हुई बहस
  2. कोर्ट में उठी कैविएट निरस्त करने की मांग
  3. सिंधिया परिवार संपत्ति केस में सुनवाई टली

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़े बहुचर्चित विवाद में मंगलवार को जिला न्यायालय में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई का केंद्र बिंदु स्वर्गीय पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी की ओर से दायर कैविएट रहा।

कोर्ट में कैविएट को निरस्त किए जाने की मांग उठाई गई, जिस पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। मामले की गंभीरता और रिकार्ड की विशालता को देखते हुए न्यायालय ने अगली सुनवाई 10 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित कर दी।


कैविएट के समर्थन में अपना पक्ष रखा

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की सबसे बड़ी बुआ दिवंगत पद्माराजे सिंधिया की बेटी की ओर से उनके दामाद न्यायालय में उपस्थित हुए और कैविएट के समर्थन में अपना पक्ष रखा। वहीं अन्य पक्षकारों की ओर से तर्क दिया गया कि कैविएट के साथ केवल आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जबकि उसके समर्थन में कोई आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए हैं। ऐसे में कैविएट को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि कैविएट दाखिल करने वाले पक्ष ने अब तक अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं। इस पर अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।

1000 पन्नों का रिकॉर्ड कोर्ट में पेश

इसके बाद मामले से संबंधित लगभग 1000 पन्नों का रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। इस रिकॉर्ड में पूर्व की कार्यवाही, दावा-आपत्ति, फैमिली सेटलमेंट से जुड़ा राजीनामा तथा अन्य अभिलेख शामिल हैं।

रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने कहा कि इतने विस्तृत दस्तावेजों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय आवश्यक है। इसी कारण मामले में तत्काल कोई आदेश पारित नहीं किया गया और अगली सुनवाई 10 अक्टूबर 2026 तय कर दी गई।

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पक्ष सुनें फिर हो राजीनामा

गौरतलब है कि सिंधिया राजघराने की संपत्तियों को लेकर वर्षों से विभिन्न अदालतों में विवाद लंबित है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सहित परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा फैमिली सेटलमेंट के आधार पर विवाद समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

इसी बीच पद्माराजे सिंधिया की बेटी प्रतिमा देवी ने कैविएट दाखिल कर दावा किया कि उनकी दिवंगत मां ग्वालियर के अंतिम महाराजा जीवाजीराव सिंधिया और राजमाता विजयाराजे सिंधिया की ज्येष्ठ पुत्री थीं। इसलिए यदि संपत्ति विवाद का निपटारा आपसी समझौते से किया जाता है तो उनकी शाखा के वैधानिक अधिकारों और हिस्सेदारी पर भी विचार किया जाना चाहिए तथा उनका पक्ष सुने बिना कोई अंतिम आदेश पारित न किया जाए।