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कुत्तों के प्यार में खूनी संघर्ष: ग्वालियर में कुत्तों के चक्कर में फूट रहे पड़ोसियों के सिर, थानों में लगी कतारें

आलम यह है कि पुलिस भी अब संगीन अपराधियों से निपटने के बजाय पड़ोसियों के बीच कुत्तों के कारण पैदा हो रही उलझनों को सुलझाने में जुटी है।

By amit mishraEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 11:51:22 AM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 12:01:52 PM (IST)
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कुत्तों के प्यार में खूनी संघर्ष: ग्वालियर में कुत्तों के चक्कर में फूट रहे पड़ोसियों के सिर, थानों में लगी कतारें
सोशल मीडिया

HighLights

  1. सड़क से घरों तक पहुंचा 'कुत्ता युद्ध'
  2. अपराधी छोड़ श्वान विवाद सुलझा रही पुलिस
  3. टोकने पर लाठी-डंडे और सोशल मीडिया पर 'पशु क्रूरता' का राग

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर की सड़कों पर श्वान तो आम लोगों के लिए पहले से ही मुसीबत बने हुए थे, लेकिन अब 'कुत्ता प्रेम' पड़ोसियों के बीच खूनी संघर्ष की वजह बनने लगा है। स्थिति यह हो चुकी है कि बात-बात पर होने वाली कहासुनी अब सीधे लाठी-डंडों और सिर फुटव्वल तक पहुंच चुकी है।

ग्वालियर के विभिन्न थानों में आए दिन ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। जहां विवाद की जड़ सिर्फ 'कुत्ते' हैं। आलम यह है कि पुलिस भी अब संगीन अपराधियों से निपटने के बजाय पड़ोसियों के बीच कुत्तों के कारण पैदा हो रही उलझनों को सुलझाने में जुटी है।


पुलिसअपराधियों को पकड़ें या श्वान विवाद सुलझाए: विभिन्न थाना क्षेत्रों में हर दिन ऐसे मामले दर्ज हो रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन विवादों के कारण उनका काफी समय बर्बाद हो रहा है।

गली से लेकर घरों तक 'कुत्ता युद्ध' शहर में: पालतू और आवारा श्वानों को लेकर पड़ोसियों के बीच तनाव चरम पर है। विवाद के मुख्य रूप से दो कारण सामने आ रहे हैं...

  • गंदगी: पालतू श्वानों को पड़ोसियों के घर के सामने शौच कराना या उन्हें खुला छोड़ देना, जिससे दूसरों में डर का माहौल रहता है। श्वान पड़ोसियों पर हमला कर रहे हैं। ऐसे में टोकने भर से ही मारपीट तक की नौबत आ रही है।
  • स्ट्रीट डाग्स को खाना खिलाना: गली के आवारा कुत्तों को मोहल्ले में खाना खिलाना, जिसके बाद श्वान वहीं डेरा डाल लेते हैं और आने-जाने वाले लोगों व अन्य पड़ोसियों या बच्चों पर झपटते हैं।
  • टोकने पर ही झगड़ा: जब भी कोई पड़ोसी इस बात का विरोध करता है, तो बात सुलझने के बजाय झगड़े तक पहुंच जाती है। मामला थानों तक पहुंच जाता है। इंटरनेट मीडिया पर लाइव आकर 'श्वान प्रेमी' इसे पशु क्रूरता से जोड़ देते हैं, तो वहीं पीड़ित पक्ष इसे अपनी सुरक्षा से जोड़कर देखता है। नतीजा गाली-गलौज, मारपीट और फिर थाने के चक्कर।

उदाहरण से समझिये....कैसे उलझ रही पुलिस

  • बहोड़ापुर क्षेत्र में एक महिला कुत्ते को पालती है। कुत्ते पूरे मोहल्ले में 22 लोगों पर हमला कर चुके थे। जब लोगों ने कुत्ते पकड़ने के लिए निगम की गाड़ी बुलवाई तो कार्रवाई रुकवा दी। तीन दिन तक पुलिस इस विवाद में ही उलझी रही। पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए।
  • अचलेश्वर रोड स्थित सूरी पेट्रोल पंप पर कार में पेट्रोल डलाने पहुंचे संदीप कुशवाह पर संचालक के कुत्तों ने हमला कर दिया। जब कर्मचारियों से कहा तो संदीप को कर्मचारियों ने बेरहमी से पीटा।
  • किलागेट के पास रहने वाली 17 वर्षीय किशोरी पर 17 जून को पड़ोसी अशोक पाठक के कुत्ते ने हमला कर दिया। जब पड़ोसी को टोका तो वह बोला सड़क किसी की नहीं। कुत्ते ऐसे ही खुले में घूमेगा। ग्वालियर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।