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अमित मिश्रा, नईदुनिया: साइबर ठगी के मामलों में लंबे समय से परेशान आम लोगों को अब राहत मिलने लगी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर से 25 दिसंबर 2025 को ग्वालियर से शुरू की गई ई-जीरो FIR व्यवस्था ने पुलिसिंग सिस्टम को अधिक जवाबदेह बना दिया है। दिल्ली के बाद मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य है, जहां यह व्यवस्था लागू हुई। इसके बाद केवल एक महीने में ग्वालियर में साइबर फ्रॉड की FIR की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
साइबर ठगी के मामलों में वर्षों से चली आ रही सबसे बड़ी समस्या FIR दर्ज न होना अब काफी हद तक दूर होती दिखाई दे रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 25 दिसंबर 2025 को ग्वालियर से मध्यप्रदेश में ई-जीरो FIR (e-zero FIR) व्यवस्था की शुरुआत की थी। इस पहल के साथ ही मध्यप्रदेश, दिल्ली के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया, जहां साइबर ठगी के मामलों में यह व्यवस्था लागू की गई।
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पहले साइबर ठगी का शिकार हुए लोग थानों, साइबर क्राइम विंग और पुलिस अधिकारियों के चक्कर काटते रहते थे। कई मामलों में महीनों तक FIR दर्ज नहीं होती थी और आवेदन फाइलों में दबकर रह जाते थे। अब इस नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई पीड़ित साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करता है, उसकी ई-जीरो FIR दर्ज हो जाती है।
ई-जीरो FIR दर्ज होने के बाद तीन दिन के भीतर संबंधित थाने को मूल FIR दर्ज करनी होती है। इसके साथ ही विवेचक की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। विवेचक को समयबद्ध तरीके से जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, बरामदगी और चालान पेश करना होता है। लापरवाही की स्थिति में उसकी जवाबदेही भी तय होगी।
इस व्यवस्था के प्रभाव का अंदाजा आंकड़ों से साफ लगाया जा सकता है।
पहले क्राइम ब्रांच केवल उन्हीं मामलों में FIR दर्ज करती थी, जिनमें ठगी की रकम अधिक होती थी या फरियादी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंच जाता था। छोटे मामलों में आवेदन रद्दी बनकर रह जाते थे। औसतन हर दिन तीन साइबर ठगी की घटनाएं होने के बावजूद FIR गिने-चुने मामलों में ही होती थी।
ई-जीरो FIR के लागू होने से अब पुलिस केवल खाते फ्रीज कराने तक सीमित नहीं रह गई है। विवेचक को ठगों, बिचौलियों और किराए के खाते उपलब्ध कराने वालों को पकड़ने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। समय पर जांच पूरी न होने पर जवाबदेही तय की जाएगी।
पिछले साल दिल्ली में साइबर ठगी के मामलों में ई-जीरो FIR की शुरुआत की गई थी, जहां यह प्रयोग सफल रहा। उसी मॉडल को अपनाते हुए मध्यप्रदेश में इसे लागू किया गया, जिससे अब हर थाने में साइबर अपराध से जुड़े मामले दर्ज होने लगे हैं।
1. पुलिस जांच टाल नहीं सकेगी, FIR के साथ तुरंत कार्रवाई होगी।
2. पीड़ित की कानूनी स्थिति मजबूत होगी, पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ेगी।
3. जिम्मेदारी अब केवल साइबर क्राइम विंग तक सीमित नहीं रहेगी।
4. थानों में काम बंटेगा, जिससे जांच तेज होगी।
5. साइबर क्राइम विंग बड़े और जटिल मामलों पर ध्यान दे सकेगी।
ई-जीरो एफआईआर (e-zero FIR) व्यवस्था लागू होने के काद अब तक 36 मामले दर्ज हुए हैं। इससे पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी। साइबर क्राइम विंग ही अब तक पड़ताल करती थी। जिससे चुनिंदा मामलों पर ही फोकस कर पाती थी। अब सभी थानों को विवेचना करनी होगी। साइबर क्राइम विंग बड़े केस देखेगी और विशेष आपरेशन चलाएगी।
-धर्मवीर सिंह, एसएसपी