
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: बैसली नदी के किनारे बसे 140 परिवारों को नगर निगम द्वारा जारी किए गए बेदखली नोटिस अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गए हैं। इस मुद्दे ने भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही मतभेद उजागर कर दिए हैं। वहीं प्रभावित परिवार भी दो गुटों में बंट गए हैं और अलग-अलग नेताओं के माध्यम से न्याय की मांग कर रहे हैं।
कुछ परिवार पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल के जरिए अपनी समस्या उठा रहे हैं, जबकि अन्य भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। एक ही मुद्दे पर पार्टी के भीतर अलग-अलग आवाजें उठने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, विधानसभा चुनाव में अभी ढाई वर्ष का समय है, लेकिन नेताओं ने अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है। इस मुद्दे को भी उसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल ने आरोप लगाया है कि बैसली नदी के किनारे हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में भेदभाव किया जा रहा है। उनका कहना है कि रसूखदार लोगों के अतिक्रमण को नजरअंदाज कर गरीब परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि नदी के पुनर्जीवन अभियान के तहत वे लंबे समय से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि अतिक्रमण के कारण कई जगह नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ है। रमौआ बांध से लेकर हुरावली तिराहे तक सफाई अभियान में भी उनकी भूमिका रही है।
रविवार को VIP सर्किट हाउस में आयोजित जनचौपाल में उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया की मौजूदगी में प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनीं। साथ ही मंगलवार को बाल भवन में अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकालने की बात कही।
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल का कहना है कि कई प्रभावित परिवार पिछले 40-50 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं और उनके पास जमीन से संबंधित दस्तावेज भी मौजूद हैं। ऐसे में उन्हें अतिक्रमणकारी मानना उचित नहीं है।
उन्होंने बताया कि पीड़ितों के लिए नगर निगम आयुक्त और जिलाधीश के समक्ष अपनी बात रखने के लिए बैठक आयोजित कराई गई है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
ग्वालियर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में दोनों नेताओं की सक्रियता को आगामी चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। मुन्नालाल गोयल पहले यहां से चुनाव जीत चुके हैं, जबकि आशीष अग्रवाल भी हाल के महीनों में क्षेत्र में सक्रिय हुए हैं।
मुरार क्षेत्र में बैसली नदी किनारे रहने वाले लोगों ने बेदखली नोटिस मिलने के बाद नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय से मुलाकात की। उनका कहना था कि उनके पास रजिस्ट्री और नामांतरण जैसे सभी वैध दस्तावेज हैं, इसके बावजूद उन्हें नोटिस दिए गए हैं।
कई परिवारों ने जीवनभर की जमा पूंजी से मकान बनाए हैं, जिससे अब उनमें भय का माहौल है। इस पर निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश और सर्वे के आधार पर की गई है और सभी को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।