
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। चिरवाई क्षेत्र की 114 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज हो गई है। मामले में दो रियल एस्टेट कंपनियों समेत सात नाम ऑनलाइन खसरों में दर्ज पाए गए हैं।
प्रशासन अब अन्य पांच लोगों को भी नोटिस जारी करने की तैयारी में है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सरकारी भूमि को निजी व्यक्तियों और बिल्डरों के नाम पर किस स्तर पर और कब दर्ज किया गया।
चिरवाई की 114 बीघा सरकारी भूमि के मामले में प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। दो रियल एस्टेट कंपनियों के संचालकों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि अन्य पांच नामों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। कलेक्टर ने पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राजस्व अभिलेखों की जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी भूमि पर निजी लोगों के नाम किस प्रक्रिया के तहत दर्ज किए गए। प्रारंभिक जांच में सांठगांठ की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर हुआ, इसकी पड़ताल की जा रही है।
शिकायत के अनुसार ग्राम चिरवाई के लगभग 30 सर्वे नंबरों की भूमि मूल रूप से सरकारी है। राजस्व रिकॉर्ड में इन्हें टीला, चरनोई, पड़ती कदीम, खाल, खद्दर, पड़ती जदीद और नाला जैसी श्रेणियों में दर्ज किया गया था। यह भूमि सार्वजनिक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और मवेशियों के चराई क्षेत्र के रूप में आरक्षित मानी जाती है।
जांच में देवभूमि बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड और मेगा इन्फ्रास्टेट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े नाम सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ सर्वे नंबर ऑनलाइन रिकॉर्ड में इनके नाम दर्ज हो गए। तहसीलदार लश्कर की ओर से दोनों कंपनियों के संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
चिरवाई के पास स्थित करीब 50 बीघा भूमि को लेकर भी प्रशासन को शिकायत मिली है। इस जमीन को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। आरोप है कि निजी नामों से दर्ज भूमि बाद में बिल्डरों के नाम स्थानांतरित कर दी गई। प्रशासन इस पूरे मामले की भी अलग से जांच कर रहा है।
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