
हर्ष श्रीवास्तव, नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भारत में लंबे समय तक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए तकनीक और भविष्य के कौशलों तक पहुंच सीमित रही है। लेकिन एक युवा सामाजिक उद्यमी ने इस चुनौती को अवसर में बदलने का बीड़ा उठाया।
यह कहानी है अभिषेक दुबे की, जिन्होंने सरकारी स्कूलों के बच्चों को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने का सपना देखा और उसे हकीकत में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं। अभिषेक दुबे की कहानी किसी प्रेरक फिल्म की तरह है। साधारण परिवार में जन्मे अभिषेक ने अपनी पढ़ाई सरकारी स्कूलों में की।
पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि निजी स्कूलों के छात्रों को जहां कंप्यूटर, इंटरनेट और नई तकनीकों की सुविधा मिलती है, वहीं सरकारी स्कूलों के बच्चे इन अवसरों से काफी दूर रह जाते हैं। यही अंतर उनके मन में एक सवाल बनकर उभरा, क्या सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी भविष्य की तकनीक से नहीं जोड़ा जा सकता। इसी सवाल का जवाब खोजते हुए साल 2017 में उन्होंने मुस्कान ड्रीम्स फांउडेशन की स्थापना की। सात राज्यों के 50 से अधिक जिलों में काम कर रही संस्था अभिषेक बताते हैं कि हमारी शुरुआत छोटी थी, लेकिन उद्देश्य बड़ा था।
सरकारी स्कूलों के बच्चों को तकनीक, नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से परिचित कराना था। धीरे-धीरे यह पहल एक आंदोलन का रूप लेने लगी। आज मुस्कान ड्रीम्स देश के सात राज्यों के 50 से अधिक जिलों में काम कर रही है और करीब 10 लाख छात्रों तक पहुंच बना चुकी है। संस्था का उद्देश्य है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को 21वीं सदी के कौशल सिखाए जाएं ताकि वे भविष्य की बदलती दुनिया के लिए तैयार हो सकें।
मुस्कान ड्रीम्स के प्रमुख कार्यक्रमों में डिजिटल शाला और इनोवेटर्स ऑफ टुमॉरो शामिल हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, कोडिंग और प्रोजेक्ट आधारित सीखने का अवसर मिलता है। खास बात यह है कि बच्चे केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सीखते, बल्कि अपने आसपास की समस्याओं का समाधान भी तकनीक और नवाचार के जरिए खोजने की कोशिश करते हैं।
अभिषेक दुबे का मानना है कि शिक्षा में बदलाव लाने के लिए शिक्षकों को सशक्त बनाना बेहद जरूरी है। इसलिए मुस्कान ड्रीम्स शिक्षकों को प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधन और निरंतर मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराती है, ताकि वे अपनी कक्षाओं में तकनीक और एआई आधारित शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
संस्था ने कई राज्य सरकारों के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों में तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का भी सहयोग मिला है, जिनमें गूगल डॉट ओआरही, अमेजान, डेल टेक्नोलाजी और एसबीआई फाउंडेशन जैसे संस्थान शामिल हैं। अभिषेक दुबे की सोच साफ है। वे कहते हैं, भारत का भविष्य हमारे सरकारी स्कूलों के बच्चों में है। अगर हम उन्हें तकनीक, एआई और भविष्य के कौशलों से लैस करें, तो वे न केवल अपना जीवन बदल सकते हैं बल्कि देश के विकास की नई कहानी भी लिख सकते हैं।
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आज उनका सपना सिर्फ एक संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे भारत की कल्पना है जहां सरकारी स्कूलों का हर बच्चा तकनीक और नवाचार की दुनिया में आत्मविश्वास के साथ कदम रख सके। यही वजह है कि अभिषेक दुबे को शिक्षा के क्षेत्र में उभरते सामाजिक उद्यमियों में गिना जाता है और उन्हें फॉरवेस एशिया की सोशल एंटरप्रेन्योर्स सूची में भी स्थान मिल चुका है। सरकारी स्कूल से शुरू हुआ यह सफर अब लाखों बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रहा है और यही है एक सच्चे उगते सूरज की पहचान।