वर्चस्व की ऐसी जंग: 5 साल में 2 हत्या, 2 गैंगरेप सहित 9 केस....दुश्मनों को फंसाने झूठे षड़यंत्र रच रहे
ग्वालियर के बन्हेरी गांव में दुश्मनी के चलते झूठे अपराध रचने का मामला सामने आया। पुलिस ने सख्ती बढ़ाते हुए आरोपियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 21 Mar 2026 10:38:28 AM (IST)Updated Date: Sat, 21 Mar 2026 10:38:28 AM (IST)
बन्हेरी गांव हाल ही में एक बार फिर सुर्खियों। (फोटो- एआई जनरेटेड)HighLights
- बन्हेरी गांव में दुश्मनी में झूठा अपराध रचने का मामला।
- पहली बार षड़यंत्र रचने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई।
- दोनों पक्षों पर कई गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर के आरोन का बन्हेरी गांव हाल ही में एक बार फिर सुर्खियों में आया, जब यहां दुश्मनों को फंसाने के लिए बाकायदा अपराध का ही झूठा षड़यंत्र रच दिया गया। पहली बार ऐसा हुआ कि जब झूठा षड़यंत्र रचने वाले पर ही एफआइआर दर्ज की गई और इन्हें जेल भेज दिया गया।
पिछले पांच साल से बन्हेरी पुलिस और प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ है। यहां रावत समाज के ही दो पक्षों में वर्चस्व की जंग इतनी बढ़ चुकी है कि दुश्मन को फंसाने किसी भी हद तक जा रहे हैं। इसी वर्चस्व की लड़ाई में अब तक दो हत्या, दो गैंगरेप की एफआइआर सहित 9 केस दर्ज हो चुके हैं।
दोनों ही पक्षों के 140 लोगों पर केस दर्ज हैं, फिर भी कानून-व्यवस्था यहां बड़ी चुनौती है। 2021 के बाद से हर साल यहां एक-दो अपराध दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर दर्ज कराते हैं। गैंगरेप की जो एफआइआर हुई थीं, उसे लेकर भी तमाम चर्चाएं हैं। यह भी दुश्मनी का बदला लेने के लिए ही कराई गई थी, ऐसा गांव के लोग बताते हैं।
अब यहां अपराध का फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बाद पुलिस सख्ती कर रही है। दोनों ही पक्षों के लोगों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब जो भी अपराध करेगा या अपराध का झूठा षड़यंत्र रचेगा, उनके हथियार लाइसेंस भी निरस्त कराये जाएंगे। यह सारी कवायद यहां शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए कराई जा रही है।
ऐसे शुरू हुआ विवाद....हर साल इसी में उलझी रही पुलिस:
- बन्हेरी के पूर्व सरपंच विक्रम रावत और पीएफ कमिश्नर मुकेश रावत के परिवार में सरपंच के चुनाव से अदावत शुरू हुई थी। विक्रम की मां सरपंच थीं, फिर विक्रम सरपंच बन गया। इसी अदावत के चलते मुकेश रावत पक्ष ने विक्रम के चचेरे भाई रामनिवास रावत की 2021 में हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड का मुख्य गवाह था विक्रम रावत।
- इस हत्याकांड के बाद 2022 में दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर गैंगरेप की एफआइआर कराई।
- विक्रम रावत की 9 अक्टूबर 2023 को पड़ाव स्थित कांति नगर में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पीएफ कमिश्नर मुकेश रावत काे मुंबई विमानतल से पकड़ा गया था। अन्य आरोपी भी पकड़े गए। इसी दिन विक्रम के पक्ष के लोगों ने मुकेश के पक्ष के लोग एवं समर्थकों के घर आगजनी, तोड़फोड़, लूट की।
- अब इस मामले में विक्रम के चचेरे भाई अजब सिंह रावत ने खुद को गोली मारी और आरोप उन लोगों पर लगाया जो लोग आगजनी, तोड़फोड़, लूट के मामले में फरियादी थे, जिससे राजीनामा हो जाए।
किस मामले में कितने आरोपी
- 1- रामनिवास रावत हत्याकांड: 12 आरोपी
- 2- विक्रम रावत पक्ष की ओर से गैंगरेप की एफआइआर- 4 आरोपी
- 3- मुकेश रावत पक्ष की ओर से गैंगरेप की एफआइआर- 5 आरोपी
- 4- विक्रम रावत हत्याकांड- 5 आरोपी
- 5- आगजनी, लूट, तोड़फोड- 78 आरोपी
- 6- आत्महत्या के लिए उकसाना- 15 आरोपी
- 7- दूसरों का जीवन खतरे में डालना- 4 आरोपी
- 8- झूठी गवाही के लिए धमकाना सहित अन्य धारा- 19 आरोपी
- 9- फर्जी गोलीकांड- 12 आरोपी
कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
बन्हेरी गांव में जो भी कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करेगा, सख्त कार्रवाई की जाएगा। अपराध का षड़यंत्र रचने वालों को जेल भेजा गया है। अब प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी कराएंगे। जो कानून हाथ में लेगा, हथियार लाइसेंस भी निरस्त कराएंगे और सख्त कार्रवाई करेंगे। धर्मवीर सिंह, एसएसपी