'100% प्योर' देखकर खरीद रहे हैं सामान? FSSAI ने बड़े ब्रांड्स के दावों की खोली पोल
एफएसएसएआई ने कई कंपनियों के 100% प्योर और 100% नेचुरल दावों पर सवाल उठाते हुए नोटिस जारी किए। जांच में प्रोसेस्ड सामग्री मिलने पर उपभोक्ताओं को लेबल प...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 05:54:05 PM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 05:54:05 PM (IST)
FSSAI ने बड़े ब्रांड्स के दावों की खोली पोल। (एआई जनरेटेड)HighLights
- FSSAI ने भ्रामक दावों पर नोटिस जारी किए।
- कई उत्पादों में प्रोसेस्ड सामग्री मिली।
- 100% नेचुरल दावा गलत पाया गया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अगर आप भी पैकेज्ड फूड पर लिखे 100 प्रतिशत प्योर या 100 प्रतिशत नेचुरल जैसे दावों को देखकर उन्हें बेझिझक खरीद लेते हैं, तो सावधान हो जाने की जरूरत है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने बाजार में बेचे जा रहे कई प्रमुख ब्रांड्स के उत्पादों के इन दावों की हवा निकाल दी है।
हाल ही में खाद्य नियामक ने मशहूर एफएमसीजी कंपनी समेत कई अन्य बड़ी कंपनियों को उनके कई प्रोडक्ट्स पर लिखे भ्रामक दावों को लेकर कड़ा नोटिस जारी किया है। एफएसएसएआई द्वारा की गई शुरुआती जांच और खाद्य नमूनों के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि लेबल पर सौ प्रतिशत प्योर या सौ प्रतिशत नेचुरल लिखने वाली ये कंपनियां असल में उपभोक्ताओं को गुमराह कर रही थीं।
जांच में पाया गया कि इन उत्पादों में प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट्स, प्रिजर्वेटिव्स या फ्लेवर एन्हांसर्स का इस्तेमाल किया गया था, जिसके चलते इन्हें पूरी तरह से प्राकृतिक या शुद्ध नहीं माना जा सकता। खाद्य कानूनों के तहत ऐसे झूठे दावों के जरिए किसी उत्पाद की बिक्री करना कानूनन गलत और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
हाल के दिनों में एफएसएसएआई का कड़ा रुख
- पहली बार कार्रवाई: यह पहला मौका नहीं है जब एफएसएसएआई ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री पर नकेल कसी है। पिछले कुछ महीनों में संस्था ने भ्रामक विज्ञापनों और दावों पर चौतरफा कार्रवाई की है।
- फलों के जूस से हटाना पड़ा दावा: एफएसएसएआई के कड़े रुख के बाद कंपनियों को पैकेज्ड फ्रूट जूस के डिब्बों से 100 प्रतिशत रियल जूस या 100 प्रतिशत प्योर जूस जैसे शब्द हटाने पड़े, क्योंकि री-कान्स्टिट्यूटेड (पानी मिलाकर बनाए गए) जूस को शत-प्रतिशत प्राकृतिक नहीं कहा जा सकता।
हेल्थ ड्रिंक्स पर शिकंजा: नियामक ने हाल ही में ई-कामर्स प्लेटफार्म्स और कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे माल्ट-बेस्ड या शुगरी ड्रिंक्स को हेल्थ ड्रिंक की श्रेणी में बेचना बंद करें, क्योंकि कानून में ऐसी कोई श्रेणी परिभाषित नहीं है।
मसालों और खाद्य तेलों पर कसौटी: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर मसालों में एथलीन आक्साइड की मिलावट और खाद्य तेलों में ब्लेंडिंग को लेकर भी कई नामी कंपनियों को नोटिस जारी किए गए थे और खराब बैच वापस मंगाए गए थे। उपभोक्ता यह ध्यान रखें
- एफएसएसएआई की इस कार्रवाई से साफ है कि सिर्फ पैकेट की चमक-दमक या आर्गेनिक व नेचुरल जैसे लुभावने शब्दों पर भरोसा करना समझदारी नहीं है। किसी भी उत्पाद को खरीदते समय उसके सामने के हिस्से पर लिखे विज्ञापनों के बजाय पैकेट के पीछे बनी सामग्री की सूची और न्यूट्रिशनल इंफार्मेशन को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
- यदि उसमें कृत्रिम रंग, अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड सामग्री या केमिकल कोड्स दर्ज हैं, तो वह उत्पाद किसी भी सूरत में 100 प्रतिशत नेचुरल नहीं है। एफएसएसएआई ने कंपनियों को अपने लेबल सुधारने का स्पष्ट निर्देश दिया है, ताकि आम जनता धोखा खाने से बच सके।