
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मिलावट पर शिकंजा कसने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने ग्वालियर जिले में अभियान तेज कर दिया है। दूध एवं दुग्ध उत्पादों की सघन जांच के दौरान विभाग ने ग्वालियर और डबरा में कार्रवाई करते हुए तीन लाख रुपये से अधिक कीमत का संदिग्ध घी जब्त किया है।
जब्त किए गए घी के नमूने जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने सबसे पहले सदर बाजार, मुरार स्थित जैन घी एवं किराना स्टोर का निरीक्षण किया।
यहां धौलपुर फ्रेश देसी घी का लगभग 120 किलोग्राम स्टाक मिला। गुणवत्ता संदिग्ध होने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी गिरीश राजौरिया ने घी का नमूना लेकर शेष स्टाक नियमानुसार जब्त कर लिया। जब्त घी की अनुमानित कीमत एक लाख दो हजार 200 रुपये बताई गई है। इसके बाद टीम ने सुभाषगंज, डबरा स्थित मित्तल ट्रेडर्स पर कार्रवाई की।
यहां गोवर्धन प्योर गाय घी का करीब 56 लीटर स्टाक, जिसकी अनुमानित कीमत 45 हजार 360 रुपये थी, संदिग्ध पाए जाने पर उसका नमूना लेकर शेष स्टाक जब्त कर लिया गया। इसी क्रम में जोधपुर मिष्ठान भंडार, सुभाषगंज डबरा का निरीक्षण किया गया। यहां वास्तु घी का नमूना लेकर लगभग 75 किलोग्राम घी, जिसकी अनुमानित कीमत 52 हजार 495 रुपये है, नियमानुसार जब्त किया गया।
खाद्य सुरक्षा विभाग की दूसरी टीम ने दाल बाजार स्थित मयंद ट्रेडर्स पर भी कार्रवाई की। खाद्य सुरक्षा अधिकारी लखनलाल ने यहां गोवर्धन प्योर गाय घी का नमूना लेकर शेष 55 किलोग्राम (68 पैकेट) घी को जब्त कर लिया। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी विधिक नमूने जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजे जा रहे हैं। प्रयोगशाला से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. मेघ सिंह सागर अभिहित अधिकारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि इस मामले में केवल खुदरा विक्रेताओं तक जांच सीमित नहीं रखी है। निर्माता, स्टाकिस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर सहित पूरी सप्लाई चेन की जांच शुरू कर दी गई है। यदि जांच में घी अमानक या मिलावटी पाया जाता है, तो संबंधित सभी पक्षों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।