
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। बेटी की जिंदगी बचाने के लिए एक पिता अपना अंग तक दान कर दे और वर्षों तक उसके इलाज के लिए हर संभव प्रयास करता रहे, इससे बड़ा त्याग शायद ही कोई हो। ग्वालियर के सेवानिवृत्त डीएसपी देवेंद्र सिंह कुशवाह और उनकी बेटी खुशबू की कहानी पिता के इसी निस्वार्थ प्रेम की मिसाल है।
करीब 60 वर्ष की उम्र में जब डाक्टरों ने खुशबू के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत बताई तो देवेंद्र सिंह ने बिना किसी संकोच के अपनी किडनी देने का फैसला किया।
किडनी प्रत्यारोपण के बाद कुछ वर्षों तक खुशबू की तबीयत ठीक रही। परिवार को उम्मीद थी कि अब वह सामान्य जीवन जी सकेगी। लेकिन समय के साथ उसकी तबीयत फिर बिगड़ने लगी। बेटी को बचाने की उम्मीद में पिता ग्वालियर से भोपाल और अन्य शहरों तक इलाज के लिए लगातार दौड़ते रहे। डाक्टरों से सलाह लेने से लेकर उपचार की व्यवस्था तक उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।
बीमारी के आगे बेटी की जिंदगी आखिर नहीं बच सकी। खुशबू के निधन से परिवार गहरे दुख में है। पीछे रह गई है एक ऐसी कहानी, जिसमें पिता ने अपनी किडनी देकर बेटी को जिंदगी देने की कोशिश की और आखिरी वक्त तक उसकी सांसों के लिए संघर्ष करते रहे। वक्त बेटी को छीन ले गया, लेकिन पिता का यह त्याग हमेशा उनके रिश्ते की सबसे मार्मिक गवाही बना रहेगा।