ग्वालियर निगम परिषद बैठक में चर्चा की जगह हंगामा, बीजेपी-कांग्रेस पार्षदों के बीच आई हाथापाई की नौबत
ग्वालियर नगर निगम परिषद बैठक में सभापति की अनुपस्थिति, नियमों के विवाद, केबल खरीद जांच, सीवर-जलभराव मुद्दे और पार्षदों के हंगामे के चलते बैठक स्थगित क...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 07:18:20 PM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 07:18:20 PM (IST)
ग्वालियर निगम परिषद बैठक में चर्चा की जगह हंगामा। (फाइल फोटो)HighLights
- सभापति की अनुपस्थिति पर भाजपा-कांग्रेस पार्षदों में तीखा विवाद हुआ।
- विवाद बढ़ा, पार्षदों के बीच हाथापाई जैसी स्थिति बन गई।
- सीवर, जलभराव मुद्दे पर पार्षद आसंदी के सामने धरने बैठे।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जलविहार में शुक्रवार को नगरनिगम परिषद की अभियाचित बैठक थी। बैठक में एजेंडे में तय बिंदुओं पर चर्चा होनी थी, लेकिन मुद्दों पर तो चर्चा नहीं हुई। बैठक की शुरुआत से भाजपा व कांग्रेस के पार्षद एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए हंगामा करते रहे।
बात यहां तक पहुंच गई कि पार्षदों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। हालांकि परिषद के अन्य पार्षदाें ने अलग अलग किया। इसके बाद चर्चा शुरू भी हुई, लेकिन तीन पार्षद सभापति की आसंदी के सामने जमीन पर बैठकर सीवर व सड़कों पर जलभराव की समस्या को लेकर धरना देने लगे। इसके बाद फिर हंगामा शुरू हो गया। इसके बाद सभापति की जगह बैठक की अध्यक्षता कर रही पैनल सभापति मंजू राजपूत ने बैठक को स्थगित कर दिया।
सभापति को लेकर शुरू हुआ हंगामा
- शुक्रवार को परिषद की अध्यक्षता सभापति मनोज तोमर नहीं कर रहे थे। वे सभा में मौजूद नहीं थे। उनकी जगह पर सभापति पैनल में दूसरे नंबर की पार्षद मंजू राजपूत सभापति की अासंदी पर बैठकर अध्यक्षता करने लगी। जैसे ही बैठक शुरू हुई वैसे ही कांग्रेस पार्षद अंकित कट्टल ने सभापति की गैरमौजूदगी में पैनल सभापति को लेकर नियम पढ़ने की मांग की।
- इसी बात पर अंकित कट्टल व भाजपा पार्षद गिर्राज कंषाना के बीच बहस शुरू हो गई। इस बहस में दोनों ही पक्षों के अन्य पार्षद शामिल हो गए। बहस धीरे धीरे हंगाामें बदल गई और दोनों ही पार्षद आमने सामने आ गए और दोनों एक दूसरे से हाथापाई पर उतारू हो गए। हालांकि बाद में अन्य पार्षदों ने उन्हें पकड़ा और अलग अलग किया। हालांकि सभापति के आदेश पर नियम भी पढ़ा गया। लेकिन नियम में स्थिति स्पष्ट न होने से दोनों ही पक्ष शांत हो गए।
सभापति को लेकर यह नियम
- सभापति की गैर मौजूदगी में बैठक की अध्यक्षता करने के लिए दो पैनल सभापति चुने जाते हैं। इनमें पैनल में एक व दो नंबर की स्थिति होती है। यानि मुख्य सभापति नहीं होते तो पहले तो पैनन में एक नंबर पर मौजूद पार्षद सभापति की आसंदी पर बैठता है। यदि वह भी नहीं है तो दूसरे नंबर का पैनल सभापति बैठक का संचालन करता है।
- आज इसलिए विवाद हुआ क्योंकि मुख्य सभापति की अनुपस्थिति में पैनल में नंबर एक सभापति गिर्राज कंषाना देरी से आए थे। ऐसे में दूसरे नंबर की पैनल सभापति मंजू राजपूत आसंदी पर बैठ गई। चूंकि एक बार सभापति की आसंदी पर कोई बैठ जाता है तो वही बैठक की पूरी कार्रवाई को संचालित करता है।
इसलिए हुआ हंगामा और विवाद
- परिषद बैठक में निगम में केबल खरीद में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट पेश की जानी थी। इसमें पहले नोडल अधिकारी अभिलाषा बघेल को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद फिर से मामले की जांच समिति ने की और उसके संयोजक भाजपा पार्षद व पैनल सभापति गिर्राज कंषाना थे।
- बताया जाता है कि चूंकि जांच समिति के संयोजक गिर्राज कंषाना थे। चूंकि आज वे सभापति की आसंदी पर होते तो उन्हें ही निर्णय लेना पड़ता। बताया जाता है कि इसलिए ही वे देरी से आए तो उनकी जगह पर मंजू राजपूत आसंदी बैठ गई। इसी बात को कांग्रेस पार्षद मुद्दा बनाने लगे।
सीवर व जलभराव की समस्या को लेकर पार्षद बैठे आसंदी के सामने धरने पर
- वर्षा के दौरान सड़कों पर हुए जलभराव व उफन रही सीवर लाइनों की समस्या को पहले भाजपा पार्षद ब्रजेश श्रीवास ने उठाया और फिर सुरेश सोलंकी ने इसी मुद्दे पर महापौर व अफसरों को घेरा। अपनी मांग पूरी न होने से वे आसंदी के सामने धरने पर बैठ गए।
- इसके बाद उनका साथ देने के लिए ब्रजेश श्रीवास भी बैठ गए। उनका साथ देने के लिए एक भाजपा महिला पार्षद भी आ गई। इसके बाद और हंगामा होने लगा तो सभापति मंजू राजपूत ने सभा काे स्थगित कर दिया।
ये भी हुआ बैठक में
- कलेक्टर व निगम आयुक्त के साफ पानी में खड़े होकर फोटो को लेकर पार्षदों ने कहा अफसर केवल अपने अफसरों को दिखाने के लिए साफ पानी में फोटो खिंचवाते हें। जबकि समस्या वाले क्षेत्रों में नहीं जाते। जहां पर जलभराव की वजह से बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे।