नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। गजराराजा मेडिकल कालेज (जीआरएमसी) से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों को मिलने वाले भोजन के नाम पर बड़ी गड़बड़ी चल रही है।
सरकारी थाली से भी घटिया
अस्पताल की कैंटीन में मरीजों को 175.90 रुपये प्रति थाली के हिसाब से भोजन दिया जा रहा है, जिसकी गुणवत्ता जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) की 48 रुपये वाली सरकारी थाली से भी घटिया है। पौष्टिक आहार के दावों के बीच मरीजों को कागज की पत्तलों पर पानी वाली दाल परोसी जा रही है, जिससे जीआरएमसी के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।
कागज की पत्तल पर दिया जा रहा है खाना
नियमों के मुताबिक यह कैंटीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए अधिकृत है, लेकिन इसकी सप्लाई दूसरे विभागों जैसे कार्डियोलाजी में भी की जा रही है। हद तो तब हो गई जब कार्डियोलाजी में मरीजों को भोजन थाली के बजाय कागज की पत्तल पर दिया जा रहा है। मरीजों का आरोप है कि कर्मचारी पत्तल पर पतली दाल और सब्जी परोसकर चले जाते हैं, जिसे खाना तो दूर, देखना भी मुश्किल है।
1.60 करोड़ का टेंडर और साठगांठ के संकेत
पिछले साल दिसंबर में कैंटीन का 1.60 करोड़ रुपये का आफलाइन टेंडर निकाला गया था। टेंडर प्रक्रिया के दौरान ही पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। कुल 11 आवेदकों ने हिस्सा लिया था, लेकिन आरोप है कि प्रक्रिया पूरी होने तक कई योग्य आवेदकों को बुलाया तक नहीं गया।
डीन ने खुद इस कैंटीन का शुभारंभ किया था, लेकिन गुणवत्ता की लगातार शिकायतों और नियमों के उल्लंघन के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। चर्चा है कि इस 'महंगे भोजन और घटिया क्वालिटी' के पीछे ठेकेदार और जिम्मेदारों के बीच बड़ी साठगांठ है।
मरीजों की जुबानी-
शिवपुरी मेडिकल कालेज इससे बेहतर इससे कहीं अच्छा और बेहतर खाना तो हमारे शिवपुरी मेडिकल कालेज में मिलता है। यहां तो कागज की पत्तल पर खाना देकर कर्मचारी चले जाते हैं। - हरिराम, मरीज
मरीजों को पौष्टिक आहार मिलना चाहिए, लेकिन यहां पानी जैसी दाल और दो रोटी थमा दी जाती है। यह 176 रुपये जैसा खाना तो कतई नहीं है।- राजू, मरीज
अफसरों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
मरीजों के खान-पान को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। डीन से शिकायतों के बाद भी एक्शन न लेना यह दर्शाता है कि ठेकेदार को संरक्षण प्राप्त है। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि जब जेएएच में 48 रुपये में भोजन मिल सकता है, तो यहां करीब चार गुना कीमत पर भोजन क्यों दिया जा रहा है।
ये भी जाने
- थाली की कीमत 175.90 रुपये, लेकिन गुणवत्ता 50 रुपये से भी कम।
- प्रक्रिया से लेकर भोजन वितरण तक पारदर्शिता का अभाव।
- बीमार मरीजों को थाली के बजाय कागज की पत्तल पर भोजन।
जेएएच के प्रवक्ता डा. मनीष चतुर्वेदी बोले...
तय मैन्यू के अनुसार मरीजों को भोजन वितरण करने के निर्देश हैं। अगर इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की जा रही है, तो संबंधित को निर्देशित किया जाएगा कि नियम के अनुसार भोजन का वितरण किया जाएगा।
सुपर स्पेशियलिटी के टेंडर पर कार्डियोलाजी में भी सप्लाई।
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