ग्वालियर बनेगा हेल्थकेयर हब: 1000 करोड़ से बदलेगी JAH और GRMC की सूरत, मास्टर प्लान को मिली मंजूरी
Gwalior Healthcare Hub: परियोजना पूरी होने के बाद ग्वालियर न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी उ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 04 Aug 2026 02:48:12 PM (IST)Updated Date: Tue, 04 Aug 2026 02:48:44 PM (IST)
HighLights
- विधानसभा अध्यक्ष और डिप्टी सीएम ने मास्टर प्लान को दी सैद्धांतिक स्वीकृति
- अत्याधुनिक अस्पताल, नए हॉस्टल और ग्रीन परिसर से बेहतर होंगी स्वास्थ्य सेवाएं
- मरीजों, डॉक्टरों और अटेंडरों के लिए विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जयाआरोग्य अस्पताल समूह (जेएएच) और गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय (जीआरएमसी) अब आधुनिक मेडिकल परिसरों की श्रेणी में शामिल होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए मास्टर प्लान को मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री (डिप्टी सीएम) राजेंद्र शुक्ल ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
परियोजना पूरी होने के बाद ग्वालियर न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी उपचार और शोध के क्षेत्र में भी नई पहचान स्थापित करेगा।
दिल्ली के विशेषज्ञ व बीडीसी की टीम ने किया मास्टर प्लान तैयार
दिल्ली के विशेषज्ञ और बीडीसी की टीम द्वारा तैयार मास्टर प्लान का उद्देश्य केवल नए भवनों का निर्माण नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सा परिसर को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है। योजना के तहत अत्याधुनिक अस्पताल भवनों के साथ पुराने भवनों का जीर्णोद्धार, आंतरिक सड़कों का उन्नयन, सुव्यवस्थित पार्किंग, हरित परिसर और मरीजों के साथ आने वाले स्वजन (अटेंडरों) के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
जेएएच पहुचंने वाले हजारों मरीजों को मिलेगा लाभ
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ उन हजारों मरीजों को मिलेगा, जो प्रतिदिन इलाज के लिए जेएएच पहुंचते हैं। बेहतर अधोसंरचना और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से उपचार की गुणवत्ता में सुधार होगा, वहीं मेडिकल छात्रों, रेजीडेंट डाक्टरों और नर्सिंग विद्यार्थियों को शिक्षण एवं आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने इससे पहले मास्टर प्लान में जिन सुधारों और संशोधनों के निर्देश दिए थे, उन्हें बीडीसी की विशेषज्ञ टीम ने प्रस्ताव में शामिल किया था। इसके बाद परियोजना को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। अब अंतिम प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।