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पुलिस महकमे में आनन-फानन में पदोन्नति, दागी चेहरों को भी मिला मौका, कई पात्रों के नाम सूची से बाहर

इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। अकेले ग्वालियर-चंबल में ही ऐसे कई निरीक्षक हैं, जिनके ख़िलाफ़ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद भी इन...और पढ़ें

By amit mishraEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 06:44:49 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 10:49:21 PM (IST)
पुलिस महकमे में आनन-फानन में पदोन्नति, दागी चेहरों को भी मिला मौका, कई पात्रों के नाम सूची से बाहर
पुलिस महकमे में आनन-फानन में पदोन्नति।

HighLights

  1. इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
  2. अकेले ग्वालियर-चंबल में ही ऐसे कई निरीक्षक शामिल हैं।
  3. आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद भी पदोन्नति मिल गई।

अमित मिश्रा, ग्वालियर। पुलिस विभाग में बीते कुछ दिनों से जारी आनन-फानन में की गई पदोन्नति (प्रमोशन) की प्रक्रिया अब बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। विभाग द्वारा जल्दबाजी में जारी की गई प्रमोशन लिस्ट में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इस सूची में उन पुलिसकर्मियों के नाम भी शामिल हैं, जो वर्तमान में गंभीर आपराधिक मामलों, विभागीय जांच या कोर्ट केस का सामना कर रहे हैं।

इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। अकेले ग्वालियर-चंबल में ही ऐसे कई निरीक्षक हैं, जिनके ख़िलाफ़ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद भी इन्हें पदोन्नति मिल गई।

ख़ुद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी इस बात ख़ामी को दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं। इसके विपरीत कई ऐसे पात्र पुलिसकर्मी हैं, जिनके नाम सूची से बाहर हो गए हैं। पात्र होने के बाद भी जिन पुलिसकर्मियों के नाम सूची से बाहर हो गए, ऐसे पुलिसकर्मी काफी संख्या में गुरुवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचे।


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यह विसंगतियां, कई नाम सूची से गायब

- स्थापित नियमों के अनुसार, यदि किसी अधिकारी के खिलाफ कोई आपराधिक प्रकरण विचाराधीन हो या विभागीय जांच चल रही हो, तो उसका प्रमोशन लिफाफा बंद कर दिया जाता है। फैसला आने तक पदोन्नति रोकी जाती है। लेकिन इस बार ''''आनन-फानन'''' में कई ऐसे चेहरों को प्रमोट कर दिया गया, जिन पर गंभीर आरोप हैं। ग्वालियर में पदस्थ निरीक्षक मंगल सिंह पपोला पर सीबीआइ द्वारा फर्जी एनकाउंटर के मामले में केस दर्ज किया गया, वह फरार भी रहे थे। पीटीएस तिघरा में पदस्थ निरीक्षक रूपेश शर्मा पर दुष्कर्म का केस दर्ज है।

- कई पुलिसकर्मियों का वार्षिक गोपनीय प्रतिविदेन की अपडेट जानकारी नहीं पहुंची है, जिससे इनके नाम सूची से बाहर हो गए। कुछ ऐसे पुलिसकर्मी हैं, जिनकी जांच खत्म हो चुकी हैं, फिर भी सूची से नाम गायब हैं।

- निरीक्षक से डीएसपी पदोन्नति सूची में तो सेवानिवृत्त हो चुके पुलिसकर्मी का नाम शामिल है। जबकि एक अन्य पुलिसकर्मी को नाम समान होने पर पदोन्नति रुक गई। दूसरे पुलिसकर्मी की जांच चल रही है।

2015 बैच के उपनिरीक्षकों ने पुलिस मुख्यालय में लगाई गुहार, बोले- जूनियर बैच के सूबेदार आरआइ बन गए:

2015 बैच के उपनिरीक्षकों ने पुलिस मुख्यालय में गुहार लगाई है। पदोन्नति में विसंगति का विषय उठाते हुए इनका कहना है- इनके जूनियर बैच के सूबेदार प्रमोट होकर रक्षित निरीक्षक बना दिए गए लेकिन इनके बैच के कुछ ही पुलिसकर्मियों को पदोन्नत किया गया।

प्रदेशभर से इस बैच के करीब 199 उपनिरीक्षक हैं। जिनका कहना है- पात्र होने के बाद भी उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई। जबकि निरीक्षक से उपपुलिस अधीक्षक के पद पर पदोन्नति होने के चलते 240 पद निरीक्षक के रिक्त हो गए हैं। इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आवेदन भी दिया है।

ग्वालियर-चंबल अंचल में पदस्थ इस बैच के उपनिरीक्षकों के मुताबिक उनके बैच में 333 उपनिरीक्षक थे। इसमें से 134 को ही पदोन्नत किया गया। जबकि निरीक्षकों के अब भी रिक्त पद हैं।

199 उपनिरीक्षकों को पदोन्नत नहीं किया गया। 2016 बैच के सूबेदार भी रक्षित निरीक्षक बना दिए गए। पुलिस मुख्यालय की कार्मिक शाखा के पत्र 1006-2026 के हिसाब से पदोन्नति की मांग उपनिरीक्षकों ने की है।

इस बैच के उपनिरीक्षकों का कहना है- उनसे पूर्व के बैच को 8 से लेकर 11 साल में ही पदोन्नत कर दिया गया लेकिन उन्हें उपनिरीक्षक पद पर करीब 12 साल हो चुके हैं लेकिन उपदोन्नत नहीं किया गया।