
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर हैं। घरों और मंदिरों में बाल-गोपाल के जन्मोत्सव की धूम है। ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की’ के जयकारे गूंजने वाले हैं। लेकिन ग्वालियर के सिटी सेंटर स्थित अल्कापुरी इलाके में एक घर ऐसा भी है, जहां जन्माष्टमी की खुशी के बीच छह महीने पुराने बिछोह का दर्द है। विजया शर्मा आज भी अपने लड्डू-गोपाल के लौटने का इंतजार कर रही हैं।
मामला 29 जनवरी 2026 का है। विजया शर्मा रोज की तरह अपने लड्डू-गोपाल को एक टोकरी में बिठाकर माधोगंज के बाजार में सब्जी लेने गई थीं। बाजार की चहल-पहल के बीच सामान खरीदते समय उनके लड्डू-गोपाल गुम हो गए।
विजया के लिए लड्डू-गोपाल महज धातु की मूर्ति नहीं थे। वह उन्हें घर के छोटे बच्चे की तरह मानती थीं। उन्हें नहलाना, भोग लगाना और सुलाना उनकी रोज की दिनचर्या का हिस्सा था। कान्हा के गायब होने के बाद विजया का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
कान्हा की तलाश में विजया ने कोई इलाका नहीं छोड़ा। उन्होंने थाने के सैकड़ों चक्कर लगाए और लगातार अपने लड्डू-गोपाल को तलाशती रहीं। उनकी कृष्ण भक्ति और कान्हा से जुड़ाव को देखते हुए तत्कालीन आइजी अरविंद सक्सैना ने एसआइटी भी बनाई थी। छह महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस की एसआइटी लड्डू-गोपाल को खोज नहीं सकी। विजया की तलाश और इंतजार आज भी जारी है।
जन्माष्टमी पर जब पूरा शहर माखन-मिश्री के भोग और सोहर गीतों में डूबेगा, विजया अपने कान्हा के वस्त्र और झूले को निहारकर भावुक हो जाएंगी। वह कान्हा को अपना भाई बोलती थीं। पहली बार रक्षाबंधन भी उन्हें कान्हा के बिना मनाना पड़ा।
विजया शर्मा ने नईदुनिया से बातचीत में कहा कि अगर कोई उनके कान्हा को ढूंढकर वापस लाता है तो वह उसे इनाम भी देंगी। जन्माष्टमी पर उनकी एक ही आस है- उनके लड्डू-गोपाल वापस घर लौट आएं।