नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्यप्रदेश में 32 घी ब्रांडों के नकली होने के संदेह में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इनके पीछे की पूरी सप्लाई चेन खंगालना शुरू कर दिया है। जांच का दायरा केवल दुकानों में रखे घी तक सीमित नहीं है। निर्माता से लेकर स्टाकिस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर तक की कड़ी को जांच में शामिल किया गया है। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली उत्पाद कहां से आया, किसने स्टाक किया, किसके जरिए बाजार में पहुंचा और किन-किन दुकानों तक इसकी सप्लाई हुई।
विभाग की कार्रवाई का अहम पहलू यह है कि किसी एक दुकान या उत्पाद पर कार्रवाई के बजाय उसकी पूरी सप्लाई लाइन को ट्रेस किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित कारोबारियों के बिल, स्टाक रिकार्ड, खरीद-बिक्री दस्तावेज और सप्लाई रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं। इसके साथ ही पैकेजिंग, लेबल और बैच संबंधी जानकारी की भी पड़ताल की जाएगी। दस्तावेजों और उत्पाद से जुड़ी जानकारी को जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास होगा कि नकली घी का स्रोत क्या है और वह बाजार तक किस रास्ते से पहुंचा। ग्वालियर में भी घी ब्रांडों की जांच शुरू कर दी गई है।
32 ब्रांडों के नाम जांच के दायरे में
जिन ब्रांडों को लेकर संदेह के आधार पर विवेचना शुरू की गई है, उनमें स्वागत, माही सागर, घी राजा, राधा माधव, शिव सागर, रत्नागिरि, वास्तु, ब्रजवासी, श्री मूल, भूमि, द्वारकेश, मिल्कियों, माखन मिश्री, अमृत, जाओ अमृत, सात्विक, कृष्ण, स्वादिष्ट, एसआइए, सुद्धम, रिवाज, कृष्णा कुंज, जयंत, उदय ताजा, केसर भोग, डेयरी प्लस, ग्वाला, गुमर, वंशज, अनुज, धौलपुर फ्रेश देशी घी और गोवर्धन प्योर गाय घी शामिल है।
जांच रिपोर्ट खोलेगी असली खेल
फिलहाल 32 ब्रांड जांच के दायरे में हैं और निर्माता से रिटेलर तक पूरी सप्लाई चेन की विवेचना शुरू हो चुकी है। अब जांच रिपोर्ट पर निगाह है। यदि किसी उत्पाद में गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी और सप्लाई नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े हैं, यह भी जांच के बाद सामने आएगा।
सवाल सिर्फ घी का नहीं, सप्लाई नेटवर्क का भी
जांच में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि किसी उत्पाद में अनियमितता मिलती है तो उसकी शुरुआत कहां से हुई। क्या उत्पाद निर्माता स्तर पर तैयार हुआ, किसी सप्लायर से आया या सप्लाई चेन के किसी चरण में गड़बड़ी हुई। इसी का जवाब तलाशने के लिए निर्माता, स्टाकिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर के दस्तावेजों का मिलान रिटेलरों के खरीद-बिक्री रिकार्ड से किया जाएगा। इससे संबंधित उत्पाद की आवाजाही और बाजार में पहुंची मात्रा का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
विभिन्न घी ब्रांडों को लेकर संदेह के आधार पर जांच शुरू की गई है। जांच में केवल उत्पाद ही नहीं, बल्कि उसकी पूरी सप्लाई चेन को देखा जा रहा है। निर्माता, स्टाकिस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेलर के स्तर पर उपलब्ध बिल, स्टाक एवं सप्लाई रिकार्ड की पड़ताल की जाएगी। जांच और परीक्षण के निष्कर्ष के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। -डॉ. एमएस सागर, अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, ग्वालियर।