दतिया जिले के 15 परिवार चिह्नित
योजना के पहले चरण में मध्य प्रदेश के दतिया और शिवपुरी जिलों को चुना गया है। दतिया जिले के परिसारी, उन्नाव और सेसई गांव में 15 परिवारों को चिह्नित किया गया, जहां 10 विशिष्ट औषधीय पौधों के गमले लगाए जाएंगे। बाद में यही प्रक्रिया शिवपुरी में दोहराई जाएगी। इन पौधों को लगाने का उद्देश्य केवल हरियाली नहीं, बल्कि घर में ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना है।
फालो-अप सिस्टम विशेषता
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका फालो-अप सिस्टम है। अनुसंधान संस्थान के अधिकारी केवल पौधे बांटकर जिम्मेदारी नहीं छोड़ेंगे, बल्कि हर दो महीने में वह चिह्नित परिवारों के घर पहुंचेंगे और देखेंगे कि पौधों की स्थिति कैसी है और क्या परिवार ने छोटी बीमारियों में इनका उपयोग किया। इस दौरान परिवार की सेहत पर पड़े सकारात्मक प्रभाव का डाटा जुटाया जाएगा ताकि भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सके।
प्रोजेक्ट की कमान अनुभवी अनुसंधान अधिकारियों की टीम संभाल रही है। इसमें प्रधान अन्वेषक डा. अनिल मंगल (अनुसंधान अधिकारी, आयुर्वेद) हैं। सह अन्वेषक के रूप में डा. डीएस रोतकर और डा. एसबी सिंह काम करेंगे।
ये पौधे बनेंगे 'फैमिली डाक्टर'
सीसीआरएएस ने 14 औषधीय पौधों की सूची बनाई है। इनमें तुलसी, ब्राह्मी, अडूसा, गिलोय, हड़जोड़, ग्वारपाठा, कालमेघ, पुदीना, पत्र अजवाइन, भांगरा, हरी चाय, कढ़ी पत्ता, मंडूकपर्णी और भूई आंवला शामिल हैं। हर घर में इनमें से 10 पौधे लगाए जाएंगे। ये पौधे सर्दी-खांसी से लेकर लिवर, पाचन और इम्यूनिटी तक की आम समस्याओं में काम आते हैं।
औषधीय पौधे व उनके फायदे
1. तुलसी: सर्दी-खांसी, गले की खराश और सांस की तकलीफ में असरदार। इम्यूनिटी बढ़ाती है, तनाव घटाती है, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्राल नियंत्रित करती है।
2. ब्राह्मी: याददाश्त बढ़ाने, तनाव और अनिद्रा कम करने में उपयोगी। एकाग्रता बढ़ाती है, अल्जाइमर जैसे न्यूरो रोगों में लाभकारी।
3. अडूसा: खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस में फायदेमंद। कफ निकालता है, गले की खराश और सूजन घटाता है।
4. गिलोय: इम्यूनिटी बूस्टर। डेंगू, मलेरिया जैसे बुखार, डायबिटीज, पाचन में लाभकारी। शरीर को डिटाक्स करती है।
5. हड़जोड़: टूटी हड्डी जोड़ने, जोड़ों के दर्द और सूजन घटाने में रामबाण। आस्टियोपोरोसिस में हड्डी मजबूत
करती है।
6. ग्वारपाठा: पाचन सुधारता है, कब्ज और एसिडिटी में आराम देता है। त्वचा की जलन, घाव, बालों का झड़ना और जोड़ों के दर्द में असरदार।
7. कालमेघ: लिवर की रक्षा करता है, बुखार उतारता है, पेट के कीड़े मारता है। ब्लड शुगर नियंत्रित करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है।
8. पुदीना: पेट दर्द, गैस, एसिडिटी दूर करता है। सांस की दुर्गंध, सर्दी-खांसी, माइग्रेन और पिंपल्स में लाभकारी।
पत्र अजवाइन: पाचन, सर्दी-खांसी, गले की खराश और त्वचा की एलर्जी में असरदार। एंटी आक्सीडेंट से भरपूर।
भांगरा: बाल झड़ना रोकता है, काला करता है। सिरदर्द, त्वचा विकार और पाचन की समस्या में उपयोगी।
हरी चाय: एंटी आक्सीडेंट से भरपूर। वजन घटाने, दिल की सेहत, टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मददगार।