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एमपी की सबसे बड़ी साइबर ठगी का दूसरा मास्टरमाइंड गिरफ्तार, रतलाम का मैकेनिकल इंजीनियर धराया, विदेश से चल रहा था सिंडिकेट

चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को क्रिप्टो करंसी में निवेश का झांसा देकर 21.05 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में राज्य साइबर पुलिस के हाथ दूसरी बड़ी...और पढ़ें

By amit mishraEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 11:11:45 PM (IST)Updated Date: Sat, 08 Aug 2026 07:19:01 AM (IST)
एमपी की सबसे बड़ी साइबर ठगी का दूसरा मास्टरमाइंड गिरफ्तार, रतलाम का मैकेनिकल इंजीनियर धराया, विदेश से चल रहा था सिंडिकेट
21 करोड़ की साइबर ठगी का दूसरा मास्टरमाइंड गिरफ्तार।

HighLights

  1. एमपी की सबसे बड़ी 21.05 करोड़ की ठगी में बड़ा खुलासा
  2. 21 करोड़ की साइबर ठगी का दूसरा मास्टरमाइंड गिरफ्तार
  3. 6 राज्यों में साइबर ठगी करने वाला मैकेनिकल इंजीनियर धराया

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय को क्रिप्टो करंसी में निवेश का झांसा देकर 21.05 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में राज्य साइबर पुलिस के हाथ दूसरी बड़ी सफलता लगी है। अब राज्य साइबर पुलिस ने सागर से अकाउंट हैंडलर अंकित वर्मा निवासी रतलाम को सागर से पकड़ा है। जिसने भाजपा के जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार मालवीय द्वारा उपलब्ध कराये गए बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए किया।

छह राज्यों के म्यूल खातों का बड़ा राजदार

यह खुद अकाउंट हैंडल कर रहा था। यह सिर्फ इसी ठगी में शामिल नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के छह राज्यों के म्यूल खातों का बड़ा राजदार है। जिसके मोबाइल, लैपटाप से राज्य साइबर पुलिस को चौंकाने वाले रिकार्ड मिले हैं। जिनकी पड़ताल राज्य साइबर पुलिस कर रही है। म्यूल खातों की हैंडलिंग अंकित वर्मा कर रहा था, जबकि टेलीग्राम एप से विदेश में बैठे सरगना पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। मप्र, उप्र, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब राज्यों के म्यूल खातों को हैंडल करता है।


ऐसे मिला सुराग

राज्य साइबर पुलिस ने शाजापुर से जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता जगदीश कुमार मालवीय निवासी ग्राम सिमरोल, गुलाना, शाजापुर को पकड़ा था। उसने सर्व कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति नाम की संस्था का खाता ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए दिया था। जब उसे पकड़ा गया तो उसने बताया कि उसने सिर्फ खाता उपलब्ध कराया था। इस खाते को अंकित पुत्र रूपचंद्र शर्मा निवासी इंद्रानगर, रतलाम हैंडल कर रहा था। वह बिहार के पटना में बैठकर अकाउंट हैंडल कर रहा था।

इसके बाद पुलिस डीएसपी संजीव नयन शर्मा, निरीक्षक मुकेश नारोलिया, एसआइ हिमानी दुबे, आरक्षक पुष्पेंद्र यादव उसकी तलाश में लगे। सागर में उसकी लोकेशन मिली और पुलिस ने उसे यहां से दबोच लिया। जगदीश को दो प्रतिशत कमीशन घर बैठे मिल जाता था। बाकी पूरा काम अंकित ही करता था।

ठगी की रकम आते ही देशभर के म्यूल खातों में भेजता था अंकित

आरोपित अंकित पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर है। उसका खुद का वर्कशाप भी है। पिछले करीब डेढ़ साल से वह म्यूल खातों को हैंडल कर रहा है। सबसे पहले टेलीग्राम एप से जुड़ा था। तकनीकि ज्ञान अच्छा था, इसलिए विदेश में बैठे सरगना ने उसे अकाउंट हैंडलिंग का काम दिया। सारे म्यूल खातों का रिकार्ड उस पर रहता था। जैसे ही ठगी की रकम किसी एक खाते में आती थी तो उसे दूसरे राज्यों के म्यूल खातों में भेजने का काम वह करता था। खाताधारकों को उनका कमीशन यही भेजता था, बाकी खातों का उपयोग यह खुद ही करता था।

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एपीके फाइल से चल रहा था नेटवर्क

  • खाताधारकों को डाउनलोड कराकर एक्सेस ले लेता है: यह पूरा नेटवर्क एपीके फाइल से आपरेट हो रहा था। खाताधारकों को एपीके फाइल डाउनलोड कराकर सारा एक्सेस खुद ले लेता था। इससे ओटीपी उसके ही पास आते थे। ऐसे में पुलिस नेटवर्क में ही उलझ जाती थी। लोकेशन दूसरे राज्य की मिलती और खाताधारक दूसरे राज्य में बैठा होता था।
  • जिपं सदस्य का खाता 6 राज्यों में हुई ठगी में इस्तेमाल: जिपं सदस्य द्वारा जो बैंक खाता उपलब्ध कराया गया, वह छह राज्यों में हुई साइबर ठगी में इस्तेमाल हुआ है। लंबे समय से इस खाते में ठगी का पैसा आ रहा था। ठगी का पैसा फ्रीज होने से पहले ही दूसरे खातों में चला जाता था। यह अंकित वर्मा करता था।

सागर से अकाउंट हैंडलर पकड़ा गया है। वह एपीके फाइल के जरिये खाता आपरेट करता था। यही खाता देश के छह राज्यों में हुई साइबर ठगी की अन्य वारदातों में इस्तेमाल हुआ है। आरोपितों से पूछताछ जारी है।- संजीव नयन शर्मा, डीएसपी, राज्य साइबर पुलिस