• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • ग्वालियर

सीहोर कृषि कॉलेज बनेगा सेरीकल्चर की लाइव लैब, शहतूत के पौधों से छात्रों को मिलेगा रेशम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण

RVSKVV Gwalior: सीहोर महाविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह पहल विद्यार्थियों को शहतूत उत्पादन से लेकर रेशम कीट पालन और कोकून निर्माण तक की संपूर्ण प्र...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 10:29:58 AM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 10:31:58 AM (IST)
सीहोर कृषि कॉलेज बनेगा सेरीकल्चर की लाइव लैब, शहतूत के पौधों से छात्रों को मिलेगा रेशम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण
शहतूत  के  पौधे  रोपते  छात्र  l नईदुनिया

HighLights

  1. शहतूत की खेती और रेशम कीट पालन की बारीकियां सीखेंगे छात्र
  2. कृषि शिक्षा से स्वरोजगार और नए स्टार्टअप्स के खुलेंगे द्वार
  3. परिसर में तैयार होगी रेशम उत्पादन की संपूर्ण प्रदर्शन इकाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। कृषि शिक्षा को अधिक व्यवहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के आरएके कृषि महाविद्यालय सीहोर ने अभिनव पहल की है। महाविद्यालय के कीट विज्ञान विभाग ने परिसर में शहतूत (मलबरी) के पौधों का रोपण कर रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर) के व्यवहारिक प्रशिक्षण की नींव रखी है। आने वाले समय में यही परिसर विद्यार्थियों के लिए रेशम उत्पादन की लाइव लैब के रूप में विकसित होगा, जहां वे पूरी उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से सीख सकेंगे।

कीट विज्ञान विभाग के डॉ. नीलेश रायपुरिया ने बताया कि शहतूत की पत्तियां रेशम कीट का प्रमुख आहार होती हैं। पौधों के विकसित होने के बाद महाविद्यालय में ही रेशम कीट पालन, कोकून निर्माण और रेशम उत्पादन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि आधुनिक सेरीकल्चर तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा। यह पहल कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी।


स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खुलेंगे

सीहोर महाविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह पहल विद्यार्थियों को शहतूत उत्पादन से लेकर रेशम कीट पालन और कोकून निर्माण तक की संपूर्ण प्रक्रिया को नजदीक से समझने का अवसर प्रदान करेगी। इससे उनकी तकनीकी दक्षता बढ़ेगी और भविष्य में रेशम उत्पादन आधारित स्वरोजगार एवं कृषि उद्यमिता के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोजगार सृजक बनाना भी है।

व्यवहारिक कृषि शिक्षा की ओर बड़ा कदम

कृषि विश्वविद्यालय का यह प्रयास कृषि शिक्षा को प्रयोगात्मक, तकनीकी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान ही रेशम उत्पादन की तकनीकों में दक्ष हो जाते हैं, तो वे भविष्य में इस क्षेत्र में सफल उद्यमी बन सकते हैं। शहतूत के पौधों का रोपण कर शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में कृषि महाविद्यालय को सेरीकल्चर प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

इस पहल से छात्र उत्पादन की पूरी श्रृंखला को नजदीक से समझ सकेंगे और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, रेशम उद्योग से जुड़े स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों के प्रति भी विद्यार्थियों में रुचि विकसित होगी। - डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला, कुलगुरु, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय