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ग्वालियर के डॉक्टरों का कमाल: 8 घंटे चले बड़े ऑपरेशन में ट्यूमर के साथ निकाला आधा किलो लिवर, 17 साल के लड़के को मिली नई जिंदगी

Gwalior News: ग्वालियर में पिछले एक साल से पेट के असहनीय दर्द से जूझ रहे दतिया निवासी 17 साल के किशोर शिवा को गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के सुपर स्...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Himadri Singh Hada
Publish Date: Sat, 20 Jun 2026 09:47:23 PM (IST)Updated Date: Sat, 20 Jun 2026 09:47:23 PM (IST)
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ग्वालियर के डॉक्टरों का कमाल: 8 घंटे चले बड़े ऑपरेशन में ट्यूमर के साथ निकाला आधा किलो लिवर, 17 साल के लड़के को मिली नई जिंदगी
ग्वालियर के डॉक्टरों का कमाल। (AI से जेनरेट किया गया इमेज)

HighLights

  1. ग्वालियर के डॉक्टरों ने किया कमाल
  2. ट्यूमर के साथ निकाला आधा किलो लिवर
  3. 17 साल के लड़के को मिली नई जिंदगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। पिछले एक साल से पेट के असहनीय दर्द से जूझ रहे दतिया निवासी 17 वर्षीय किशोर शिवा (परिवर्तित नाम) को गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली में आपरेशन की लंबी वेटिंग लिस्ट होने के कारण परेशान स्वजन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचे। यहां सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलाजी के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष श्रीवास्तव और उनकी टीम ने अंचल में पहली बार बेहद जटिल लेफ्ट हेपेटेक्टामी आपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

जांच में सामने आया लिवर का बड़ा ट्यूमर

मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉ. श्रीवास्तव ने सीटी स्कैन जांच कराई। जांच में सामने आया कि शिवा के लिवर के लेफ्ट लोब (बाए हिस्से) में एक बड़ा ट्यूमर था, जो उसके गंभीर पेट दर्द का मुख्य कारण था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डा. श्रीवास्तव ने बिना समय गंवाए तुरंत आपरेशन करने का निर्णय लिया।


डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती था आठ घंटे चला यह ऑपरेशन

डॉक्टरों के लिए चुनौती था आपरेशन यह आपरेशन चिकित्सा टीम के लिए एक बड़ी चुनौती था, जो करीब आठ घंटे तक चला। आपरेशन के दौरान मरीज का लगभग 600 एमएल खून बहा, जिसकी भरपाई के लिए उसे दो यूनिट खून चढ़ाया गया। डाक्टरों ने बेहद कुशलता के साथ ट्यूमर को पूरी तरह से बाहर निकाला।

सर्जरी, एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान

सर्जन और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की इस टीम का रहा योगदान सर्जरी टीम: डॉ. आशीष श्रीवास्तव (नेतृत्व), डा. सुनील सोलंकी, डा. जय रावत, डा. मयंक नागर। एनेस्थीसिया टीम: डा. सीमा शिंदे, डा. मनमोहन जिंदल, डॉ. नमृता जैन। नर्सिंग स्टाफ : नर्सिंग आफिसर नेहा गुप्ता, रजनी चौंग, स्वाति चौहान, रानू सोलंकी, और गुलनार खातून।

दिल्ली जाने की मजबूरी खत्म, स्वजन ने जताया आभार

स्वजन ने जताया आभार एम्स दिल्ली जैसे बड़े संस्थान में लंबी वेटिंग से निराश हो चुके स्वजन के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का यह प्रयास किसी वरदान से कम नहीं है। स्वजन ने पूरी मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया है। इस सफल आपरेशन ने यह साबित कर दिया है कि अब गंभीर से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली या अन्य बड़े महानगरों की ओर रुख करने की जरूरत नहीं है।

क्या होती है लेफ्ट हेपेटेक्टामी सर्जरी?

लिवर के लेफ्ट लोब में ट्यूमर का आपरेशन: लेफ्ट हेपेटेक्टामी एक बड़ी सर्जरी है जिसमें लिवर का बायां हिस्सा यानी लेफ्ट लोब निकाल दिया जाता है। यह आपरेशन तब किया जाता है जब लेफ्ट लोब में ट्यूमर हो और वह आसपास के हिस्सों में न फैला हो।

लिवर का आधा किलो हिस्सा काटकर बचाई मरीज की जान

डॉक्टर की बात लिवर के बाएं हिस्से में ट्यूमर काफी फैल चुका था। ऑपरेशन के दौरान ट्यूमर को पूरी तरह से साफ करने और मरीज की जान बचाने के लिए हमें लिवर का आधा किलो से ज्यादा का हिस्सा (लेफ्ट हेपेटेक्टामी) काटकर निकालना पड़ा। अंचल में इस तरह का यह पहला सफल आपरेशन है। अब मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। डॉ. आशीष श्रीवास्तव, एचओडी, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलाजी विभाग