
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई टेली-मानस सेवा प्रदेश में अपने मूल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में राजफाश हुआ है कि सेवा में कॉल कनेक्टिविटी, परामर्श की गुणवत्ता और मरीजों के फॉलोअप जैसे अहम पहलुओं में गंभीर खामियां हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2022 से मार्च 2024 के बीच प्राप्त हर छह में से एक कॉल कनेक्ट ही नहीं हो सकी, जबकि अधिकांश काल निर्धारित समय से पहले ही कट गईं।
अधिकांश कॉल हो गईं डिस्कनेक्ट
सीएजी ने ग्वालियर और इंदौर स्थित टेली-मानस केंद्रों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए पाया कि इस अवधि में कुल 85 हजार 260 कॉल प्राप्त हुईं। इनमें से 13 हजार 869 कॉल (16 प्रतिशत) कनेक्ट नहीं हो सकीं। परामर्श के लिए निर्धारित न्यूनतम 15 मिनट की अवधि पूरी होने से पहले ही अधिकांश कॉल डिस्कनेक्ट हो गईं। ग्वालियर मानसिक आरोग्यशाला में प्राप्त 16 हजार 238 कॉल में से 81 और इंदौर मानसिक आरोग्यशाला में 32 हजार 055 काल में से 77 प्रतिशत कॉल समय से पहले ही कट गईं। इनमें भी करीब 66 प्रतिशत काल केवल पांच मिनट के भीतर समाप्त हो गईं, जिससे प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य परामर्श पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शासन का जवाब, सीएजी संतुष्ट नहीं
शासन ने जुलाई 2025 में अपने जवाब में कहा कि कॉल की अवधि काफी हद तक मरीजों की इच्छा पर निर्भर करती है और नवंबर 2024 से मिस्ड कॉल प्रणाली लागू कर दी गई है। हालांकि सीएजी ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया। रिपोर्ट में कहा गया कि दो-तिहाई कॉल का पांच मिनट के भीतर समाप्त हो जाना पर्याप्त परामर्श न मिलने का स्पष्ट संकेत है। साथ ही रेफर मरीजों के फॉलोअप का कोई रिकार्ड न होना कार्यक्रम के क्रियान्वयन की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
फॉलोअप तंत्र पूरी तरह नाकाम
रिपोर्ट के अनुसार टियर-दो स्तर पर रेफर किए गए मरीजों के उपचार और परामर्श की निगरानी का कोई प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं मिला। ग्वालियर केंद्र से एक हजार 105 और इंदौर केंद्र से दो हजार 102 मरीजों को आगे के उपचार के लिए रेफर किया गया, लेकिन राज्य टेली-मानस सेल और संबंधित जिला अस्पतालों के पास यह रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं था कि इन मरीजों ने आगे परामर्श लिया या नहीं। ऑडिट के दौरान जांच किए गए मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों (एमएचई) ने भी पुष्टि की कि रेफर किया गया कोई भी मरीज प्रत्यक्ष परामर्श के लिए नहीं पहुंचा।